04-Feb-2026
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कोलकाता(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए एक अत्यंत गोपनीय और रणनीतिक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इसी क्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन ने सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें चुनावी रणनीति की बारीकियों और जमीनी हकीकत की समीक्षा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल चुनावी औपचारिकताओं को पूरा करना नहीं था, बल्कि संगठन की ताकत और वोट बैंक को लेकर एक व्यापक रोडमैप तैयार करना था, ताकि राज्य में सत्ता परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सके। रणनीतिकारों के अनुसार, इस बैठक का माहौल काफी गंभीर था, जहां 12 लोकसभा सांसदों और दो राज्यसभा सांसदों के साथ वन-टू-वन चर्चा की गई। बैठक के दौरान हर क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट ली गई और पार्टी ने राज्य की 100 से अधिक ऐसी विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है, जहां बीजेपी जीत की प्रबल स्थिति में है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जाए और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जाए, तो बंगाल की सियासत में एक बड़ा उलटफेर संभव है। इसी रणनीति को पार्टी ने प्लान 100से ज्यादा का नाम दिया है। नितिन ने सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में केवल ऊपरी प्रचार तक सीमित न रहें, बल्कि हर जोन में कार्यकर्ताओं को संगठित कर स्थानीय समस्याओं पर राज्य सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा करें। सांसदों को निर्देशित किया गया है कि वे जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाएं। विशेष रूप से बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाकों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है, जहां सुरक्षा, घुसपैठ और विकास जैसे मुद्दे चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के लिए विशेष योजना बनाई गई है। बैठक में यह भी तय किया गया कि केवल सांसदों के फीडबैक तक ही सीमित नहीं रहा जाएगा। आने वाले दिनों में पार्टी अध्यक्ष प्रदेश के विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी संवाद करेंगे ताकि रणनीति को और अधिक धार दी जा सके। बीजेपी की इस बढ़ती सक्रियता और प्लान 100 प्लस के कार्यान्वयन ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां बीजेपी बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। चुनावी बिगुल बजने से पहले ही बंगाल की यह बिछती हुई राजनीतिक बिसात आने वाले समय में एक बेहद दिलचस्प और कड़े मुकाबले की ओर इशारा कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/04फरवरी2026