सबसे करीबी पर लगे अमेरिका को खुफिया जानकारी बेचने के आरोप बीजिंग (ईएमएस)। चीन की सेना में बीते तीन सालों में ऐसा बदलाव हुआ है, जो देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। 2023 की शुरुआत में चीन के पास करीब 30 जनरल और एडमिरल थे, जो अलग-अलग खास विभागों और थिएटर कमांड की कमान देख रहे थे। इसमें से लगभग सभी को या बाहर कर दिया गया है या वे अचानक गायब हो गए हैं।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जांच में केवल 7 इसतरह के जनरल मिले हैं जो अब भी सक्रिय नजर आते हैं। कई अधिकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दिख रहे हैं। आधुनिक चीन के इतिहास में इतनी बड़ी उथल-पुथल पहले कभी नहीं देखी गई। इन सफाईयों की वजह से दुनिया की सबसे बड़ी सेना के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व का बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के जानकरों का मानना है कि शी जिनपिंग जरूरत से ज्यादा शक कर रहे हैं। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) में अब केवल एक जनरल हैं झांग शेंगमिन बचे है। जिनपिंग के सैन्य सफाई अभियानों की निगरानी वहीं कर रहे हैं। यह सफाई अभियान जिनपिंग की ताकत को दिखाता है। झांग का अधिकांश करियर रॉकेट फोर्स में भ्रष्टाचार विरोधी और राजनीतिक अनुशासन देखरेख में बीता है, जो चीन के परमाणु और पारंपरिक मिसाइल कार्यक्रमों को कंट्रोल करती है। शी ने उन्हें पिछले साल सीएमसी का उपाध्यक्ष बनाया था। जनरल झांग और कमांडर लियू झेनली को हटाने से वे लीडर्स बाहर हो गए हैं जो सीधे तौर पर सेना को जंग के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी निभाते थे। इस प्रक्रिया ने दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली सेना के शीर्ष पर एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है। इससे शी जिनपिंग को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी पर कुछ समय के लिए भरोसा कम हो सकता है। बात दें कि चीन में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन पर चीन के न्यूक्लियर हथियार से जुड़ी सीक्रेट जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप है। झांग को 24 जनवरी को पद से हटाया गया था। चीनी रक्षा मंत्रालय ने उन पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। झांग पर सीएमसी के अंदर अपनी अलग गुटबाजी करने और पार्टी में फूट डालने का भी आरोप है। झांग की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिनपिंग ने अपने इतने करीबी सहयोगी के खिलाफ एक्शन क्यों लिया। न्यूक्लियर सीक्रेट लीक करने के आरोपों से अलग कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि झांग बहुत ज्यादा ताकतवर हो गए थे। वहीं कुछ का कहना है कि शी को लगा कि सेना में भ्रष्टाचार इतना गहरा है कि बड़े स्तर पर सख्त कदम जरूरी है। 2012 से 2017 तक झांग चीन के हथियार खरीद विभाग के प्रमुख रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह विभाग भ्रष्टाचार के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। इस विभाग से जुड़े कई अधिकारी बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे, लेकिन झांग अब तक बचे हुए थे। अब अगर जनरल झांग पर औपचारिक आरोप तय होते हैं, तब उनका गुप्त सैन्य अदालत में मुकदमा चल सकता है। इसतरह के मामलों में सजा तय मानी जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस घटना से बीजिंग की सत्ता व्यवस्था में डर का माहौल बनेगा। आशीष/ईएमएस 06 फरवरी 2026