- फिल्म पर बैन की मांग - राजनीति में नई पटकथा तैयार लखनऊ (ईएमएस)। राजनीति के मंच पर मुद्दे बदलते रहते हैं, लेकिन कुछ किरदार हमेशा अपनी पुरानी भूमिका में लौट आते हैं। पहले यूजीसी बिल और अब वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडित’, बसपा सुप्रीमो मायावती एक बार फिर ब्राह्मण समाज के समर्थन में खुलकर सामने आ गई हैं। मायावती ने फिल्म को “ब्राह्मण समाज का अपमान” बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल बैन की मांग कर दी है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि फिल्मों के जरिए ‘पंडित’ शब्द को घुसपैठिया और घूसखोर बताकर पूरे देश में ब्राह्मण समाज का अनादर किया जा रहा है। इससे समाज में भारी रोष है और बसपा इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। उनका कहना है कि ऐसी जातिसूचक फिल्मों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ‘घूसखोर पंडित’ फिल्म कम और 2027 की रणनीति ज्यादा नजर आ रही है। मायावती इससे पहले भी यूजीसी बिल के मुद्दे पर सवर्ण समाज के समर्थन में खड़ी दिखी थीं। अब फिल्म के बहाने एक बार फिर ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश तेज हो गई है। मायावती ने यह भी याद दिलाया कि 2007 में जब बसपा की सरकार बनी थी, तब ब्राह्मण समाज को सम्मान और प्रतिनिधित्व मिला था। संकेत साफ है- पुराना सामाजिक समीकरण फिर से जिंदा करने की कोशिश। दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फिल्म के डायरेक्टर और निर्माता टीम के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अयोध्या के साधु-संत भी फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। कुल मिलाकर, ‘घूसखोर पंडित’ अब सिर्फ एक वेब सीरीज नहीं रही, बल्कि राजनीति की नई स्क्रिप्ट बन चुकी है।