राष्ट्रीय
07-Feb-2026
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- पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुले गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात के पशुपालन और डेयरी उद्योग के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। अमरेली में स्थित गुजरात पशुधन विकास बोर्ड (जीएलडीबी) की एम्ब्रियो ट्रांसफर प्रयोगशाला में अत्याधुनिक इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएप) तकनीक के माध्यम से राज्य में पहली बार शुद्ध गिर नस्ल की बछिया का सफल जन्म हुआ है। यह उपलब्धि केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि गुजरात के पशुपालकों के लिए आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। राज्य के गौरव माने जाने वाले गिर नस्ल के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, गिर गाय के ब्रीडिंग ट्रैक क्षेत्र में आने वाले विभिन्न जिलों में से अमरेली में जीएलडीबी द्वारा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एम्ब्रियो ट्रांसफर लैब की स्थापना की गई है। इस अवसर पर पशुपालन मंत्री जितू वाघाणी ने बताया कि अमरेली के वरुडी में स्थित इस प्रयोगशाला में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के तकनीकी सहयोग से पिछले वर्ष प्रारंभिक चरण में कुल 13 रिसिपिएंट पशुओं में आईवीएफ तकनीक द्वारा भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि हाल ही में कांकरेज नस्ल की रिसिपिएंट (सरोगेट) गाय के गर्भ से शुद्ध गिर नस्ल की बछिया का जन्म हुआ है। इस प्रक्रिया में उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली गिर गाय के भ्रूण का उपयोग किया गया, जिसके कारण जन्मी बछिया में भी डोनर पशु जैसे उत्कृष्ट गुण पाए गए हैं। पशुपालन विभाग की इस सफलता को और गति देने के लिए आगामी समय में अमरेली स्थित एम्ब्रियो ट्रांसफर लैब में उपलब्ध 30 से अधिक रिसिपिएंट पशुओं में भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन प्रयासों से राज्य में गिर नस्ल के संवर्धन को नई दिशा मिलेगी और गुजरात एक बार फिर श्वेत क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाएगा। सामान्यतः उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली मादा गाय अपने पूरे जीवनकाल में केवल 7 से 8 बछड़ों को जन्म देती है, लेकिन आईवीएफ जैसी आधुनिक तकनीक ने इस सीमा को तोड़ दिया है। इस तकनीक के माध्यम से एक ही उच्च गुणवत्ता वाले डोनर पशु से उसके जीवनकाल में लगभग 100 उत्कृष्ट बछड़े प्राप्त किए जा सकते हैं। आईवीएफ प्रक्रिया में श्रेष्ठ गुणों वाले पशुओं को डोनर के रूप में चुना जाता है, उनसे अंडाणु लेकर प्रयोगशाला में निषेचन किया जाता है और विकसित भ्रूण को कम या सामान्य दुग्ध उत्पादन वाली रिसिपिएंट गाय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तकनीक से जन्मे बछड़े भी डोनर पशु जैसे ही उत्कृष्ट आनुवंशिक लक्षणों वाले होते हैं। इस आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इसका सीधा लाभ गुजरात के पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने में मिलेगा। सतीश/07 फरवरी