राष्ट्रीय
07-Feb-2026
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केंद्रीय मंत्री बोले- सरकार ने किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड डील) का फ्रेमवर्क जारी होने के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाली कई अहम वस्तुओं पर 0 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है, जबकि भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्र में किसी भी तरह की रियायत नहीं दी है। पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने जिन भारतीय उत्पादों पर शून्य शुल्क लागू किया है, उनमें जेम्स एंड ज्वैलरी, डायमंड्स, फार्मा उत्पाद, स्मार्टफोन्स, मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, वेजिटेबल ऑयल, काजू, कई फल और सब्जियां शामिल हैं। इसके अलावा केला, आम, अनानास, मशरूम, वेजिटेबल रूट्स, कोको और उससे बने उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड जैसे अमरूद का जैम, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, मशीनरी पार्ट्स, एल्यूमिनियम पार्ट्स, जिंक ऑक्साइड, मिनरल्स, नेचुरल रबर, एसेंशियल ऑयल और प्लैटिनम कॉइंस जैसी वस्तुओं को भी 0 टैरिफ का लाभ मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने दो टूक कहा कि भारत ने अपने किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका को मीट, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, चीनी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, अमरनाथ, फल, ग्रीन टी, कोको, चना, एनिमल सीड्स, नॉन-एल्कोहलिक प्रोडक्ट्स, इथेनॉल और तंबाकू जैसे कृषि एवं उससे जुड़े उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी गई है। केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि इस ट्रेड फ्रेमवर्क के जरिए भारत के लिए करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था का बाजार कम टैरिफ पर खुल गया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर औसत टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो भारत के प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है। उन्होंने कहा कि जहां चीन पर 35 प्रतिशत, वियतनाम पर 20 प्रतिशत और इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत टैरिफ है, वहीं भारत को अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति मिली है। उन्होंने इस दिन को भारत की 2047 तक विकसित भारत बनने की यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण बताया। गोयल ने कहा कि फरवरी 2025 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी, जिसका लक्ष्य 500 बिलियन डॉलर का सालाना द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना है। उनके अनुसार, यह अंतरिम समझौता उस दिशा में एक बड़ा कदम है और आने वाले दिनों में भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और विभिन्न सेक्टरों के लिए नए अवसर खोलेगा। हिदायत/ईएमएस 07फरवरी26