अंतर्राष्ट्रीय
08-Feb-2026
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इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान की राजधानी शुक्रवार को हुए एक भीषण आत्मघाती हमले से दहल उठी है। इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद को निशाना बनाकर किए गए इस आत्मघाती विस्फोट में हताहतों की संख्या शनिवार तक बढ़कर 36 हो गई है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, अस्पतालों में भर्ती कई गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ गया। इस बीच, वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी ली है।वहीं पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को प्रेस वार्ता के दौरान बिना किसी ठोस सबूत के भारत पर उग्रवादी संगठनों की मदद करने का आरोप लगाया। नकवी ने दावा किया कि यद्यपि हमले के पीछे दाएश और तालिबान जैसे संगठनों के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें वित्तपोषण और लक्ष्यों की जानकारी भारत से मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इन आतंकी गतिविधियों की फंडिंग सीमा पार से हो रही है, हालांकि उन्होंने अपने इन दावों की पुष्टि के लिए कोई दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। भारत ने पाकिस्तान के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए एक बयान जारी कर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का समाधान करने के बजाय दूसरों पर दोष मढ़ने की नीति अपना रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान खुद को भ्रमित कर रहा है और भारत इस तरह के सभी निरर्थक आरोपों को खारिज करता है। इस्लामिक स्टेट ने अपने मुखपत्र अमाक के माध्यम से जारी एक बयान में इस हमले को एक फिदायीन ऑपरेशन करार दिया है। संगठन ने आत्मघाती हमलावर की पहचान सैफुल्लाह अंसारी के रूप में की है और उसकी एक तस्वीर भी साझा की है, जिसमें वह संगठन के प्रति अपनी वफादारी की शपथ लेते हुए दिखाई दे रहा है। दावे के अनुसार, यह हमला इस्लामिक स्टेट इन पाकिस्तान प्रोविंस के एक लड़ाके द्वारा अंजाम दिया गया। संगठन ने संकेत दिया कि यह हमला सांप्रदायिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जिसमें सीरिया में सक्रिय ज़ैनाबियून ब्रिगेड का भी उल्लेख किया गया है। इस भीषण त्रासदी के बाद पाकिस्तान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी शुक्रवार को बिना किसी प्रमाण के इस हमले में भारत और अफगानिस्तान की संलिप्तता का आरोप लगाया था। वहीं, मस्जिद हमले के तुरंत बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया था। अब इस्लामिक स्टेट द्वारा जिम्मेदारी लिए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के पीछे अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का हाथ है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इलाके में अलर्ट पर हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। वीरेंद्र/ईएमएस/08फरवरी2026