क्षेत्रीय
08-Feb-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के छह माह के पश्चात् सामान्य भविष्य निधि (जी.पी.एफ.) की राशि से कोई भी वसूली नहीं की जा सकती। इस आधार पर न्यायालय ने सेवानिवृत्त व्याख्याता के विरुद्ध जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया। प्रकरण के अनुसार, वार्ड नं. 7, पामगढ़, जिला जांजगीर-चाम्पा निवासी लक्ष्मीनारायण तिवारी शासकीय उच्च माध्यमिक शाला ससहा, जिला जांजगीर-चाम्पा में व्याख्याता के पद पर पदस्थ थे। वे 31 जनवरी 2011 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के 12 वर्ष बाद, कार्यालय महालेखाकार, रायपुर द्वारा उनके जी.पी.एफ. खाते में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए उनके विरुद्ध वसूली आदेश जारी कर दिया गया। इस आदेश से क्षुब्ध होकर लक्ष्मीनारायण तिवारी ने हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर उक्त वसूली आदेश को चुनौती दी। 12 साल बाद की जा रही थी वसूली याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने बताया कि, न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा कि पूर्व में उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा रामनारायण शर्मा बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा डी. आर. मंडावी बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य और हृदयनारायण शुक्ला बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य प्रकरणों में स्पष्ट न्याय दृष्टांत स्थापित किया जा चुका है। साथ ही, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 का हवाला देते हुए बताया गया कि यदि किसी शासकीय सेवक के जी.पी.एफ. खाते में ऋणात्मक शेष पाया जाता है, तो सेवानिवृत्ति की तिथि से केवल 6 माह की अवधि के भीतर ही वसूली की जा सकती है। निर्धारित अवधि के पश्चात् जी.पी.एफ. राशि से किसी भी प्रकार की वसूली विधि विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने प्रस्तुत तर्कों और न्याय दृष्टांतों से सहमत होते हुए यह माना कि सेवानिवृत्ति के 12 वर्ष पश्चात् जारी किया गया वसूली आदेश कानून के विपरीत है। परिणामस्वरूप, न्यायालय ने कार्यालय महालेखाकार रायपुर द्वारा जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 08 फरवरी 2026