कोलकाता(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस प्रक्रिया के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) राज्य में पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है और गलतियों से भरी मतदाता सूची के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और सांसद समिक भट्टाचार्य ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल त्रुटिपूर्ण वोटर लिस्ट के साथ चुनाव कराने के लिए बेताब है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बंगाल में हिंसा का दौर थम नहीं रहा है। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुईं और महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध किए गए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां इन मामलों की जांच कर रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस साक्ष्यों को मिटाने के प्रयासों में जुटी है। वहीं, भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने को ड्रामा करार दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य सरकार जब भी शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाती है, उसे हार का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनकी अपीलों का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं होता। घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार लोगों को न्याय देने में विफल रही है, जिसके कारण आम जनता को बार-बार अदालतों की शरण लेनी पड़ती है। दिलीप घोष ने ममता सरकार पर तुष्टीकरण और विपक्षी दमन का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के गांवों में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निरंतर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में विशेष समुदाय के लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। भाजपा नेताओं ने पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन टीएमसी के एक अंग के रूप में कार्य कर रहा है। इन बयानों के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर संवैधानिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/09फरवरी2026 -----------------------------------