राष्ट्रीय
09-Feb-2026
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- ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत 6 वर्षों में दलहन उत्पादन दोगुना, चना और तुअर में ऐतिहासिक वृद्धि अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में कृषि क्षेत्र के अंतर्गत दलहन फसलों ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत गुजरात अब देश में दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से चना और तुअर के उत्पादन में गुजरात राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य के किसान निरंतर प्रगति कर रहे हैं। इस संदर्भ में कृषि मंत्री जितु वाघाणी ने सांख्यिकीय विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 6 वर्षों में राज्य में दलहन फसलों की उत्पादकता में सवा गुना, बुवाई क्षेत्र में डेढ़ गुना और कुल उत्पादन में दोगुना इज़ाफा हुआ है। वर्ष 2019-20 में गुजरात में दलहन फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 9 लाख हेक्टेयर, उत्पादन 10.58 लाख मीट्रिक टन और उत्पादकता 1,173 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। वहीं वर्ष 2024-25 में दलहन फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र बढ़कर 14.39 लाख हेक्टेयर, उत्पादन 21.52 लाख मीट्रिक टन और उत्पादकता 1,495 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। गुजरात में चना सबसे प्रमुख दलहन फसल है, जिसका राज्य के कुल दलहन उत्पादन में 70 प्रतिशत से अधिक योगदान है। वर्ष 2019-20 में चने का कुल उत्पादन 6.36 लाख मीट्रिक टन था, जो ढाई गुना बढ़कर वर्ष 2024-25 में 15.63 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया। इसी प्रकार तुअर के उत्पादन में भी गुजरात देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। वर्ष 2019-20 में तुअर का उत्पादन 2.10 लाख मीट्रिक टन था, जो 45 प्रतिशत वृद्धि के साथ वर्ष 2024-25 में 3.08 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। इसके अलावा उड़द, मूंग और मठ जैसी अन्य दलहन फसलों की खेती भी अब गुजरात में बड़े पैमाने पर हो रही है। वर्ष 2024-25 में उड़द की 1.14 लाख हेक्टेयर में बुवाई और लगभग 90,000 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। वहीं मूंग की 1.38 लाख हेक्टेयर में बुवाई कर लगभग 1.26 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। मठ मुख्यतः शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की फसल है। कच्छ और उत्तर गुजरात के बनासकांठा जैसे जिलों में इसकी खेती अधिक होती है। इसके अतिरिक्त चवला, वाल और मटर को गौण दलहन फसलों के रूप में उगाया जाता है। वर्ष 2024-25 में मठ सहित अन्य दलहन फसलों की 72,000 हेक्टेयर में बुवाई और 64,000 मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन दर्ज किया गया। गुजरात में दलहन फसलों में आई इस क्रांति के पीछे राज्य सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलें जिम्मेदार हैं। ‘सौनी योजना’ और ‘सुजलाम सुफलाम’ जैसी योजनाओं से रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए जल उपलब्धता बढ़ी है। इसके साथ ही सरकार द्वारा दलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 11 से 31 प्रतिशत तक की वृद्धि किए जाने से किसान दलहन की खेती की ओर आकर्षित हुए हैं। इसके अलावा राज्य की कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित ‘गुजरात चना-3’ और ‘गुजरात मूंग-4’ जैसी उन्नत किस्मों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही, गुजरात से दलहन के निर्यात में भी दोगुनी वृद्धि होने से बुवाई क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सतीश/09 फरवरी