राष्ट्रीय
09-Feb-2026
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- टैरिफ में बड़ी कटौती से टेक्सटाइल, हीरा, फार्मा, केमिकल और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिलेगा अभूतपूर्व लाभ अहमदाबाद (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता किया गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह समझौता विशेष रूप से गुजरात के उद्योगों के लिए विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए कड़े टैरिफ को लगभग 50 प्रतिशत से घटाकर करीब 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी और उनकी मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में गुजरात आज भारत का सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन चुका है। राज्य में टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में मजबूत औद्योगिक आधार मौजूद है। इस व्यापार समझौते से इन सभी क्षेत्रों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। इस समझौते का सबसे अधिक लाभ टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग को मिलने की संभावना है। टैरिफ में कमी के चलते गुजरात के गारमेंट और होम टेक्सटाइल उत्पाद अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इसके परिणामस्वरूप मध्यम अवधि में टेक्सटाइल निर्यात में 100 से 150 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की प्रबल संभावना है। इससे राज्य के प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टरों में उत्पादन बढ़ेगा, अमेरिका से नए ऑर्डर प्राप्त होंगे और उद्योग की लाभप्रदता में भी वृद्धि होगी। यह समझौता विशेष रूप से सूरत के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। दुनिया के सबसे बड़े डायमंड पॉलिशिंग हब के रूप में पहचाने जाने वाले सूरत के हीरा उद्योग को इस निर्णय से बड़ा फायदा होगा। टैरिफ में कटौती से उद्योग का मार्जिन सुधरेगा और मांग में पुनः तेजी आएगी। साथ ही, पहले उच्च टैरिफ के कारण हुए नुकसान की भरपाई होगी और अमेरिकी बाजार में हीरा उद्योग की पकड़ फिर से मजबूत होगी। इसके अलावा, भरूच, वापी और अहमदाबाद स्थित केमिकल और फार्मा क्लस्टरों को भी इस व्यापार समझौते से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले इन क्षेत्रों के निर्यात में लगभग 25–30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, अब इसमें सुधार आएगा और उद्योगों को नई गति मिलेगी। कई फार्मास्युटिकल उत्पादों को शून्य या कम शुल्क का लाभ मिलने से अमेरिका जैसे रेगुलेटेड मार्केट में गुजरात की स्थिति और मजबूत होगी। रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में, विशेष रूप से सोलर मैन्युफैक्चरिंग को इस समझौते से नया प्रोत्साहन मिलेगा। सोलर पैनल और उनके कंपोनेंट्स का उत्पादन बढ़ेगा और अमेरिका को इनका निर्यात अब व्यावसायिक रूप से अधिक लाभकारी होगा। इससे वैश्विक सप्लाई चेन में गुजरात की भूमिका और सशक्त बनेगी। इसके साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को भी अमेरिकी बाजार में आसान प्रवेश मिलने से बड़ा लाभ होगा। निर्यात और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि का सीधा सकारात्मक प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। एमएसएमई इकाइयों, फैक्ट्रियों, लॉजिस्टिक्स और सहायक सेवाओं में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। निर्यात से जुड़े एमएसएमई सशक्त होंगे, जिससे उद्यमियों और श्रमिकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति और मजबूत बनेगी। कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका व्यापार समझौता गुजरात के औद्योगिक विकास के लिए एक ‘बूस्टर डोज़’ के समान सिद्ध होगा। टैरिफ में कटौती और व्यापारिक सुगमता से औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा, एमएसएमई को गति मिलेगी और गुजरात वैश्विक मूल्य श्रृंखला—विशेष रूप से उच्च मूल्य वाले अमेरिकी बाजार—में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा। सतीश/09 फरवरी