राष्ट्रीय
09-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। लोकसभा में हालिया घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति और गहरी चिंता जाहिर की है। यह पत्र तमिलनाडु की सांसद एस. जोतिमणि के लेटरहेड पर लिखा गया है, जिस पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, आर. सुधा, ज्योत्सना चरणदास महंत और वर्षा एकनाथ गायकवाड़ सहित कई महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं। बिरला को लिखे पत्र में विपक्ष की महिला सांसदों पर लगाए गए कथित निराधार और मानहानिकारक आरोपों तथा विपक्ष के संसदीय अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। महिला सांसदों ने लिखा कि वे यह पत्र “गहरे दुख और संवैधानिक जिम्मेदारी की भावना” के साथ लिख रही हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकसभा स्पीकर जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को सत्ताधारी पार्टी के दबाव में आकर विपक्ष की महिला सांसदों, विशेषकर कांग्रेस सांसदों, के खिलाफ झूठे और अपमानजनक आरोप लगाने पड़े। पत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का उल्लेख कर कहा गया कि स्थापित संसदीय परंपरा के बावजूद विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगातार चार दिनों तक बोलने का मौका नहीं दिया गया, जो अभूतपूर्व और अक्षम्य है। इसके विपरीत, इंडिया गठबंधन के आठ सांसदों को निलंबित किया गया, जबकि एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अशोभनीय टिप्पणी करने की अनुमति दी गई। महिला सांसदों ने बताया कि स्पीकर से मुलाकात के दौरान उन्होंने न्याय और संबंधित भाजपा सांसद के निलंबन की मांग की थी। स्पीकर द्वारा पहले गलती स्वीकार करने और बाद में केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार करने की बात कहने से उनके अधिकार और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी की गैरमौजूदगी के अगले दिन स्पीकर द्वारा जारी बयान में कांग्रेस की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए गए। पत्र में कहा गया कि उनका विरोध शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और मर्यादित रहा है। सांसदों ने खुद को साहसी, जनआंदोलनों से निकली और पहली पीढ़ी की राजनेता बताते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाना सार्वजनिक जीवन में महिलाओं पर हमला है। अंत में उन्होंने स्पीकर से निष्पक्ष भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि इतिहास उन्हें संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने वाले व्यक्ति के रूप में याद रखे, न कि सत्ताधारी दबाव के आगे झुकने वाले के रूप में। आशीष दुबे / 09 फरवरी 2026