राष्ट्रीय
11-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत की स्पेस इंडस्ट्री में एक बड़ी छलांग लगी है। अहमदाबाद की कंपनी अजिस्टा स्पेस ने अपने 80 किलोग्राम के सैटेलाइट एएफआर से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) की तस्वीरें ली हैं। यह पहली बार है जब भारत की किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष से दूसरे स्पेसक्राफ्ट को ट्रैक करके उसकी इमेज कैप्चर की है। इस इन-ऑर्बिट स्नूपिंग या स्पेस वॉच कहा जाता है। इस तकनीक से भविष्य में दुश्मन सैटेलाइट्स या मिसाइलों पर नजर रखी जा सकती है। भारत के स्पेस एसेट्स की सुरक्षा के लिए यह एक बड़ा कदम है, जहां अब 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के 50 से अधिक सैटेलाइट ऑर्बिट में हैं। अजिस्टा स्पेस ने 3 फरवरी को एक मुश्किल प्रयोग किया। उनके एएफआर नामक सैटेलाइट ने आईएसएस को ट्रैक किया और उसकी तस्वीरें लीं। आईएसएस पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर ऑर्बिट में घूमता है। एएफआर ने दो बार में आईएसएस को कैद किया, जिसमें 15 अलग-अलग तस्वीरें ली गईं। ये तस्वीरें 250 से 300 किलोमीटर की दूरी से ली गईं थीं, वह भी सूरज की उलटी दिशा में है। कंपनी ने पोस्ट किया कि आईएसएस को ट्रैक करके 2.2 मीटर सैंपलिंग वाली इमेज ली। दोनों प्रयास 100 प्रतिशत सफल रहे। यह एएफआर की ट्रैकिंग एल्गोरिदम और इमेजिंग सटीकता को साबित करता है। एएफआर सैटेलाइट को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से 13 जून 2023 को लांच किया गया था। यह भारत के लिए पहली बार है। पहले ऐसी क्षमता केवल महाशक्तियों जैसे अमेरिका, रूस या चीन के पास थी। अजिस्टा का कहना है कि एएफआर भारत का एकमात्र ऐसा सैटेलाइट है जो इस तरह का काम कर सकता है। अजिस्टा स्पेस अहमदाबाद, गुजरात में स्थित है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सनंद में है, जो एशिया की पहली निजी सैटेलाइट फैक्ट्री है। कंपनी हर साल 50 सैटेलाइट बना सकती है। यह सैटेलाइट्स, स्पेस-बोर्न सिस्टम और पेलोड्स का डिजाइन, विकास, निर्माण और इंटीग्रेशन करती है। कंपनी के कर्मचारी इसरो के 12 से ज्यादा मिशनों में शामिल रहे हैं। अजिस्टा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड (कैमरा जैसे उपकरण), इमेज प्रोसेसिंग और सैटेलाइट बस इंजीनियरिंग में मजबूत है। इन-ऑर्बिट स्नूपिंग क्या है? कैसे काम करता है? इन-ऑर्बिट स्नूपिंग का मतलब है अंतरिक्ष से दूसरे सैटेलाइट्स या ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक करना और उनकी तस्वीरें लेना। एएफआर ने आईएसएस को ट्रैक करने के लिए अपने सेंसर का इस्तेमाल किया। यह सेंसर सैटेलाइट को सटीक दिशा में घुमाता है, इमेज कैप्चर करता है। भारत के पास अब 50 से ज्यादा ऑपरेशनल सैटेलाइट्स हैं, जो कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और सर्विलांस के लिए हैं। जिसकी कीमत 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। भू-राजनीतिक तनाव में इनकी सुरक्षा जरूरी है। अगर कोई दुश्मन सैटेलाइट पास आए या हमला करे, तब एसएसए से समय पर पता चलेगा। भविष्य की संभावनाएं यह सफलता भारत की स्पेस इंडस्ट्री को नई ऊंचाई देगी। निजी कंपनियां अब सुपरपावरों जैसी तकनीक बना रही हैं। भविष्य में एएफआर जैसे सैटेलाइट्स स्पेस डेब्री को ट्रैक कर सकते हैं या मिशनों में मदद कर सकते हैं। आशीष/ईएमएस 11 फरवरी 2026