नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और एकरूपता सुनिश्चित करना है। नए नियमों के अनुसार, अब आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के पहले वंदे मातरम के छह छंदों का गायन अनिवार्य होगा। इस दौरान उपस्थित सभी व्यक्तियों के लिए सम्मानपूर्वक खड़ा होना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार, इस गीत की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विशेष अवसर पर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का एक साथ गायन किया जाना है, तो ऐसी स्थिति में वंदे मातरम का गायन पहले किया जाएगा। सरकार ने उन विशिष्ट अवसरों और कार्यक्रमों की सूची भी साझा की है जहाँ वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा। इनमें ध्वजारोहण समारोह, आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति और राज्यपालों के आगमन से पूर्व तथा उनके प्रस्थान के पश्चात का समय शामिल है। इसके अलावा, पद्म पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान समारोहों के दौरान भी राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य किया गया है। इन नियमों के माध्यम से राष्ट्रीय गरिमा को सुव्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा स्वतंत्र रूप से की गई थी, जिसे बाद में उनके 1882 में प्रकाशित प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। इस गीत का गौरवशाली इतिहास रहा है; इसे पहली बार 1896 में कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्वरबद्ध किया गया था। राजनीतिक नारे के रूप में इसका प्रभाव 7 अगस्त 1905 को बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन के दौरान पहली बार व्यापक स्तर पर देखा गया। देश की स्वतंत्रता के पश्चात, 1950 में संविधान सभा ने आधिकारिक तौर पर इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। ब्रिटिश शासन काल में वंदे मातरम देशभक्ति का इतना शक्तिशाली प्रतीक बन गया था कि तत्कालीन सरकार ने इसे दबाने की हरसंभव कोशिश की। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, पूर्वी बंगाल प्रांत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में इसके गायन पर प्रतिबंध लगा दिया था और उल्लंघन करने वाले छात्रों को सरकारी नौकरियों से वंचित करने तथा स्कूलों की मान्यता रद्द करने जैसी धमकियां दी थीं। वर्ष 1905 में रंगपुर के 200 छात्रों पर केवल वंदे मातरम गाने के कारण जुर्माना लगाया गया था। इसी तरह, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी वंदे मातरम का उद्घोष करने वाले प्रदर्शनकारियों और युवाओं पर पुलिसिया दमन की कई घटनाएं दर्ज हैं। सरकार के वर्तमान फैसले को उसी ऐतिहासिक गौरव और राष्ट्रीय अस्मिता को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/11फरवरी2026