यरूशलेम(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी परमाणु वार्ताओं के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों पक्षों की ओर से जारी धमकियों और कूटनीतिक रस्साकशी के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बेहद महत्वपूर्ण मिशन पर अमेरिका रवाना हो रहे हैं। पीएम नेतन्याहू वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। रणनीतिक रूप से यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह सातवीं आधिकारिक मुलाकात होगी, जिसने ईरान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी ये बार-बार होने वाली मुलाकातें इजरायल और अमेरिका के बीच के असाधारण और ऐतिहासिक संबंधों का प्रमाण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच आज जितनी नजदीकी है, वैसी इजरायल के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई। हालांकि इस यात्रा का मुख्य केंद्र गाजा की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा है, लेकिन नेतन्याहू के एजेंडे में सबसे ऊपर ईरान के साथ होने वाली परमाणु बातचीत और उससे जुड़ी इजरायली चिंताएं हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के सामने बातचीत के उन कड़े सिद्धांतों को रखेंगे, जो न केवल इजरायल के अस्तित्व के लिए बल्कि पूरे मध्य पूर्व की शांति और सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। इजरायली पक्ष का मानना है कि ईरान के साथ किसी भी नए समझौते में केवल परमाणु हथियारों को रोकने की बात नहीं होनी चाहिए, बल्कि यूरेनियम संवर्धन की किसी भी संभावना को पूरी तरह समाप्त करना होगा। इसके अलावा, इजरायल चाहता है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और वह आतंकवाद की फंडिंग व समर्थन बंद करे। बैठक के समय को लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे हैं। पहले यह यात्रा महीने के अंत में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे अचानक समय से पहले तय किया गया। राजनीतिक विश्लेषक इसे ओमान में हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के प्रति इजरायल की सतर्कता के रूप में देख रहे हैं। नेतन्याहू का मानना है कि बुराई की धुरी को रोकने के लिए अमेरिका का रुख सख्त रहना चाहिए। व्हाइट हाउस में बुधवार सुबह 11 बजे होने वाली इस गोपनीय बैठक के बाद फिलहाल किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना नहीं है, लेकिन बंद कमरे में होने वाली यह चर्चा मध्य पूर्व के भविष्य और ईरान के प्रति अमेरिकी नीति की नई दिशा तय कर सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/11फरवरी2026