मुंबई,(ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की से रेप के दोषी एक आदमी की उम्रकैद की सजा को कम कर 12 साल कर दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी कम उम्र, लंबे समय तक जेल में रहने और जेल में सुधार की कोशिशों को ध्यान में रखकर यह सजा दी है। बताया गया कि सुधार की कोशिशों में महात्मा गांधी पर एक निबंध प्रोग्राम में हिस्सा लेना भी शामिल है। जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने अपने आदेश में 2016 के जुर्म में आदमी की सजा को बरकरार रखा, लेकिन कहा कि उस दी गई उम्रकैद की सजा कम की जानी चाहिए। बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने आदेश दोषी की अपील पर दिया, जिसमें उसने स्पेशल पॉस्को कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि अपराध के समय दोषी की उम्र 20 साल थी, उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, वह दिसंबर 2016 से हिरासत में था और कोविड महामारी के दौरान भी रिहा नहीं किया गया था। बेंच ने जेल की पढ़ाई-लिखाई की गतिविधियों में उसके हिस्सा लेने वाले सर्टिफिकेट पर भी विचार किया, जिसमें एक निबंध कॉम्पिटिशन और महात्मा गांधी के विचारों पर स्टडी करने वाला एक प्रोग्राम शामिल था। जुर्म की गंभीरता के हिसाब से इन सुधार वाले फैक्टर्स को ध्यान में रखकर, बेंच ने कहा, हमारी राय में 12 साल की सजा इंसाफ के लिए सही होगी। इसमें आगे कहा गया कि दोषी ने जो समय पहले ही जेल में बिताया है, उसे कम की गई सजा में समायोजित कर दिया जाएगा। आशीष दुबे / 11 फरवरी 2026