लेख
16-Feb-2026
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भारत की राजधानी दिल्ली में सोमवार को दुनिया की सबसे बड़ी एआई समिट का आयोजन शुरु हो गया है। यह आयोजन 5 दिन तक चलेगा। इस समिट में शामिल होने के लिए दुनिया भर के 100 से अधिक कंपनियों के सीईओ, 20 राष्ट्राध्यक्ष तथा 135 देश के डेलिकेट शामिल हो रहे हैं। इस समिट में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कई मंत्री शामिल होने जा रहे हैं। अभी तक जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार तीन लाख से अधिक लोगों ने समिट में आने के लिए पंजीयन कराया है। एआई का उपयोग बड़े पैमाने पर हेल्थ, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में होने जा रहा है। इसके अलावा सर्विस सेक्टर में भी एआई तकनीकी पर आधारित रोबोट इत्यादि भी बड़े पैमाने पर अगले कुछ वर्षों में देखने को मिलेंगे। एआई तकनीकी के माध्यम से दुनिया एक नए बदलाव की दिशा की ओर आगे बढ़ती हुई दिख रही है। इसके परिणाम अच्छे होंगे, या बुरे यह कहना मुश्किल है। जिस तरह से 1993 में वैश्विक व्यापार संधि के माध्यम से सारी दुनिया में एक आर्थिक क्रांति की लहर पैदा की गई थी। कर्ज लेकर विकास करने और खर्च करने की नई प्रवृत्ति दुनिया के देशों और उनके नागरिकों के बीच में फैलाई गई। एक नये बाजारबाद की परिकल्पना को साकार किया गया। दुनिया के सभी देशों ने कर्ज लिया विकास की दौड़ में शामिल हो गए। वहीं आम नागरिकों को भी बैंकों और एनएफसी कंपनियों के माध्यम से कर्ज देकर उन्हें बाजारबाद की ओर धकेला गया। आज उसके दुष्परिणाम सारी दुनिया के देशों में देखने को मिल रहे हैं। सभी देशों की सरकारें भारी कर्ज से लदी हुई हैं। संस्थाओं के ऊपर भी भारी कर्ज हैं। इसी तरीके से दुनियाभर के आम नागरिक भी कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं। ब्याज और किस्त का बोझ लगातार बढ़ता चला गया। विकास की जो परिकल्पना की गई थी, उसमें अब कुठाराघात होना शुरू हो गया है। सारा विश्व उधार की अर्थव्यवस्था को लेकर संकट में आ गया है। महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम आदमी का जीवन दूभर हो गया है। इसी दौर में एआई और डिजिटल तकनीकी के माध्यम से जो नए-नए प्रयोग किये जा रहे हैं, इसके सुखद परिणाम या दुष्परिणाम होंगे, इसकी चर्चा नहीं हो रही है। दुनिया के सभी देशों में एआई को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। क्लासरूम स्मार्ट होंगे, यहां पर शिक्षकों की जरूरत नहीं होगी। स्मार्ट क्लासों में डिजिटल उपकरण और एआई की सहायता से स्कूलों और कॉलेज में बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इसी तरह कृषि के क्षेत्र में जिन कामों के लिए भारी संख्या में मजदूरों को लगाया जाता था, उस काम को अब बहुत कम समय में डिजिटल और एआई तकनीकी की मशीनों के माध्यम से किया जाएगा। रही सही कसर सर्विस क्षेत्र में जिस तरह से रोबोट, अब मानवों का स्थान लेते चले जा रहे हैं, ऐसी स्थिति में जब यह तकनीकी अपने शबाब पर होगी, तो लोगों को कैसे रोजगार या मजदूरी से जोड़ा जा सकेगा, इसको लेकर कहीं कोई चर्चा नहीं हो रही है। अभी एआई तकनीकी का आगमन पूरी तरह से नहीं हुआ है। इसके बाद भी भारत सहित दुनिया के अधिकांश देश बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लोगों के ऊपर कर्ज है, उनकी क्रय शक्ति लगातार घटती चली जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि उन्हें रोजगार भी नहीं मिलेगा, तो सामाजिक व्यवस्था को कैसे नियंत्रित किया जा सकेगा। इस पर कोई चर्चा कहीं पर भी नहीं हो रही है। सभी जगह एआई से जुड़ी तकनीकि के माध्यम से कौशल और प्रशिक्षण को बढ़ाने की बात की जा रही है। सभी क्षेत्रों को तकनीकी से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में जहां पर बड़े पैमाने पर मानव संसाधन का उपयोग होता है। सर्विस के क्षेत्र में भारत सहित दुनियाभर के करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता था। अब उन सारे कामों के लिए एआई तकनीकी डिजिटल मशीनी उपकरणों द्वारा काम कराया जाएगा। ऐसी स्थिति में जो मानव प्रजाति होगी, उसका गुजारा किस तरह से होगा, इस विषय पर दुनिया के किसी भी देश में कोई चर्चा नहीं हो रही है। 1993 में वैश्विक व्यापार संधि के तहत उधार की आर्थिक व्यवस्था का जो खेल विश्वव्यापी खेला गया था, उसमें अमीर और अमीर होते चले गए, गरीब और गरीब होते चले गए। इसका लाभ गिने चुने पूंजीपतियों को मिला। जिसके कारण दुनिया के सभी देश वर्तमान में महंगाई बेरोजगारी और अन्य समस्याओं के कारण अपनी ही जनता के साथ लड़ते हुए दिख रहे हैं। अब एआई का जो नया शिगुफा आया है वह दुनिया की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक व्यवस्था में किस तरह का असर डालेगा, इसकी चिंता किसी को नहीं है। लगता है कि हम एक बार फिर आदम युग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। जहां पर अपने अलावा और किसी के अस्तित्व की नहीं सोचते हैं। सामाजिक एवं मानवीय विकास के लिए अब हमारी कोई प्रतिबद्धता और नैतिकता नहीं बची है। आर्थिक और भौतिक संसाधनों ने हमें मशीनों की तरह असंवेदनशील बना दिया है। समय के साथ परिवर्तन होते हैं, परिवर्तन के साथ समन्वय बनाए रखना जरूरी होता है। जिस तरह से एआई को लेकर बिना सोचे-समझे सारी दुनिया आगे बढ़ रही हैं, इस दिशा में चिंतन की जरूरत है। भारत के संदर्भ में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जाना चाहिये। यदि हम एआई तकनीकी के पीछे भागकर अन्य कारणों को उपेक्षित करेंगे, तो आगे चलकर बहुत बड़ी मुसीबत आ सकती है। भारत सरकार को इस दिशा में विचार-विमर्श करने के बाद ही निर्णय लेने की जरूरत है। सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में एआई का उतना ही उपयोग किया जाना चाहिए, जो देश के लिए वर्तमान संदर्भ में जरूरी हो। ईएमएस / 16 फरवरी 26