रूसी उप प्रधानमंत्री ओवरचुक ने बिजनेस फोरम में किया ऐलान मॉस्को,(ईएमएस)। जैसे ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते की बात आगे बढ़ी थी, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से वहीं अपनी पुरानी रट लगानी शुरू कर दी कि ‘अब भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना होगा’ लेकिन भारत ने जवाब दे दिया था कि ‘हम वहीं करने वाले हैं, जो हमारे देश के हित में होगा। अब अपने इसी स्टैंड पर कायम रहकर अमेरिका और यूरोप से हाथ मिलाने के बाद भारत अब रूस के साथ ‘मेगा ट्रेड डील’ करने वाला है। इस खबर पर पहली मुहर खुद रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने मॉस्को से लगा दी है। मॉस्को के बड़े बिजनेस फोरम में रूसी उप प्रधानमंत्री ओवरचुक ने भारत के साथ होने वाली इस मेगा डील पर दिल खोलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ ‘प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट’ (पीटीए) को लेकर बातचीत का पहला राउंड एकदम सॉलिड तरीके से पूरा हुआ है। ओवरचुक इस डील को लेकर काफी ‘होपफुल’ दिखाई दिए और उन्होंने साफ संकेत दिए कि दोनों देश समझौते को जल्द से जल्द फाइनल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह समझौता सिर्फ दो देशों के बीच हाथ मिलाना भर नहीं है, बल्कि रूसी कंपनियों के लिए एक ऐसी ‘गोल्डन चाबी’ है जो सीधे 2.2 अरब लोगों के विशाल बाजार का दरवाजा खोल देगी। इसमें भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बाजार मिलकर एक ऐसी ताकत बनेगा, जिसे नजरअंदाज करना दुनिया के लिए मुश्किल होगा। 2026 के इस दौर में, जहां एक ओर अमेरिका के टैरिफ वाला दबाव है और दूसरी तरफ बदलता वर्ल्ड ऑर्डर है। इस समय में भारत और रूस की यह दोस्ती ग्लोबल बिजनेस के पुराने नियम बदलकर एक नया इतिहास लिख सकती है। रूसी उप प्रधानमंत्री ओवरचुक के मुताबिक, इस समझौते के बाद रूसी बिजनेस को भारत के विशाल उपभोक्ता आधार और ईएईयू के देशों तक सीधी पहुंच मिलेगी, जो कुल मिलाकर 2.2 अरब लोगों का एक बड़ा मार्केट बनता है। भारत और रूस ने यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू), जिसमें रूस के अलावा आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं। इनके साथ फ्री ट्रेड जोन बनाने की दिशा में बातचीत का पहला राउंड पूरा कर लिया है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल, 2024-25 में ये आंकड़ा 68.7 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। ऊर्जा (तेल) और रक्षा के अलावा अब दोनों देश फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, मशीनरी, केमिकल और तकनीक के क्षेत्र में एक-दूसरे का साथ देने की योजना बना रहे हैं। पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव के बीच दोनों देश अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) जैसे नए रास्तों को विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। आशीष दुबे / 18 फरवरी 2026