वाराणसी (ईएमएस) । भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी में आज भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों ने स्मार्ट खेती की बारीकियों को सीखा। संस्थान ने दो शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों के लिए एक विशेष भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें हॉर्टिकल्चर कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, तमिलनाडु के 109 स्नातक (बागवानी) और पीएम श्री कंपोजिट स्कूल , राजगढ़ (मिर्जापुर) के 40 छात्र शामिल हुए। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को प्रयोगशाला से लेकर खेत तक किए जा रहे अनुसंधान कार्यों से प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराना था। भ्रमण के दौरान छात्रों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को करीब से देखा और समझा। वैज्ञानिकों ने छात्रों को बिमैटो (बैंगन और टमाटर का एक ही पौधे पर ग्राफ्ट) की सफल तकनीक दिखाई। इसके अलावा, मिट्टी रहित खेती (हाइड्रोपोनिक्स) और पॉलीहाउस में नियंत्रित वातावरण में सब्जी उत्पादन की विधियों ने छात्रों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। छात्रों ने संस्थान की उन्नत प्रयोगशालाओं का दौरा किया, जहां उन्होंने ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) और आणविक जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी बारीकियों को समझा। खेतों में छात्रों ने उच्च पोषण वाली मिर्च, टमाटर और औषधीय गुणों से भरपूर सब्जियों की उन्नत किस्मों को देखा। इस दौरान जैविक खेती के मॉडल और वर्मीकम्पोस्ट बनाने की वैज्ञानिक विधि की भी जानकारी दी गई। छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सान्याल ने छात्रों से संवाद किया और कृषि एवं सब्जी अनुसंधान के क्षेत्र में उभरते करियर के अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों की वैज्ञानिक जिज्ञासाओं को शांत किया और उन्हें अनुसंधान के प्रति प्रोत्साहित किया। डॉ नरसिंह राम/18फरवरी2026