राष्ट्रीय
21-Feb-2026
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-कांचीपुरम के बुनकरों ने इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत में साड़ी बुनाई की परंपरा सदियों पुरानी रही है, लेकिन अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रवेश हो गया है। टाटा का एआई आधारित ‘डिजिटल लूम’ टेक्नोलॉजी जगत में चर्चा का केंद्र बन गया है। यह स्मार्ट करघा पारंपरिक बुनाई को आधुनिक तकनीक से जोड़ता है। इस नई तकनीक की खास बात यह है कि अब ग्राहक अपनी पसंद के रंग, डिजाइन और पैटर्न खुद चुन सकते है, और एआई ग्राहक की पंसद के अनुसार साड़ी का डिजाइन तैयार कर देता है। यह पहल टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, क्योंकि इससे न केवल काम आसान हुआ है बल्कि उत्पादन की गति भी बढ़ी है। यह डिजिटल लूम बुनाई के समय रियल-टाइम गाइडेंस देता है। यानी जब बुनकर साड़ी तैयार कर रहा होता है, तब सिस्टम बुनकर को तुरंत बताता है कि कहीं कोई गलती नहीं हो रही। इससे छोटी-छोटी त्रुटियां तुरंत सुधर जाती हैं और समय की बचत होती है। कांचीपुरम के बुनकरों ने इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। कांचीपुरम की साड़ियां अपनी खास बनावट और डिजाइन के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। एक लोकल बुनकर के अनुसार, पहले अगर बुनाई में कोई छोटी गलती हो जाती थी, तब उस गलती को सुधारने में करीब 20 मिनट लग जाते थे। अब एआई की मदद से ऐसी गलतियां लगभग खत्म हो गई हैं। इससे न केवल समय बच रहा है बल्कि काम की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। आशीष/ईएमएस 21 फरवरी 2026