नई दिल्ली (ईएमएस)। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने टी20 विश्व कप 2026 को लेकर अपने विश्लेषण में भारतीय टीम, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और विभिन्न टीमों की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने अभिषेक शर्मा की लगातार विफलता पर बात करते हुए कहा कि उनके खेलने की शैली स्वभाविक रूप से जोखिमभरी है। चोपड़ा के अनुसार, “जो खिलाड़ी पहली ही गेंद पर छक्का मार सकता है, उसका शून्य पर आउट होना भी उतना ही संभव है।” उनका मानना है कि भारत को शुरुआती चरण में मिले झटके एक तरह से “रियलिटी चेक” हैं, ताकि टीम समय रहते पिच और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सके। चोपड़ा ने सलाह दी कि द्विपक्षीय सीरीज में दबदबा दिखाने के बाद विश्व कप की अलग चुनौतियों का सामना करते समय भारतीय टीम को “अहंकार को साइड में रखकर” हर पिच के स्वभाव को समझने की जरूरत होगी। इससे सुपर-8 में पहुंचने से पहले टीम अपनी तैयारी और बेहतर कर सकेगी। सेमीफाइनल की संभावनाओं पर बात करते हुए उन्होंने ग्रुप-1 से भारत और दक्षिण अफ्रीका को प्रमुख दावेदार बताया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वेस्ट इंडीज को हल्के में लेना बड़ी भूल होगी, क्योंकि टीम में दमदार खिलाड़ी हैं और उनके क्वालीफाई करने की पूरी संभावना है। दूसरे ग्रुप को लेकर उन्होंने कहा कि मैचों पर वेन्यू विशेषकर कोलंबो और पैलेकेले का असर निर्णायक साबित हो सकता है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड उनकी दृष्टि में मजबूत टीमें हैं, लेकिन पाकिस्तान को भी उन्होंने दौड़ से बाहर नहीं माना, खासकर स्पिन परिस्थितियों में। पाकिस्तान क्रिकेट में चल रहे विवाद और पूर्व खिलाड़ियों की तीखी आलोचनाओं पर चोपड़ा ने निराशा जताई। उन्होंने कहा कि टीवी स्टूडियो में बैठकर अपनी ही टीम का उपहास उड़ाना खेल की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने सलाह दी कि पूर्व और वर्तमान खिलाड़ी एक-दूसरे का सम्मान करें और “गंदे कपड़े सार्वजनिक रूप से न धोएं।” शादाब खान की मीडिया प्रतिक्रियाओं और चल रही बयानबाजी को भी उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अंत में चोपड़ा ने पाकिस्तान क्रिकेट की सबसे बड़ी कमजोरी गिनाई टूर्नामेंट जीतने की बजाय केवल भारत को हराने पर अत्यधिक फोकस। उनके अनुसार, हॉकी से लेकर क्रिकेट तक, पड़ोसी देश में भारत के ख़िलाफ़ जीत को ही अंतिम उपलब्धि माना जाता है, जिससे टीम का वास्तविक लक्ष्य अक्सर पीछे छूट जाता है। डेविड/ईएमएस 21 फरवरी 2026