नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय निशानेबाजी की चमकती हुई सितारा मनु भाकर ने ओलंपिक में दो पदक जीतकर देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। पिस्टल शूटिंग में उनकी सटीकता, धैर्य और निरंतरता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। मनु ने कम उम्र में ही कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपने करियर की मजबूत नींव रखी। उनके पिता, मर्चेंट नेवी के चीफ इंजीनियर राम किशन भाकर और मां सुमेधा ने उन्हें ‘मनु’ नाम दिया, जो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम था। माता-पिता चाहते थे कि उनकी बेटी रानी लक्ष्मीबाई की तरह निडर और साहसी बने। मनु का बचपन सक्रिय और बहुआयामी रहा। उन्होंने स्कूल के दिनों में टेनिस, बॉक्सिंग, स्केटिंग और मार्शल आर्ट ‘थान टा’ में नेशनल लेवल मेडल जीतकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। 14 साल की उम्र में उन्होंने शूटिंग को पेशेवर करियर बनाने का निर्णय लिया। 2016 के रियो ओलंपिक के बाद उन्होंने अपने पिता से पिस्टल खरीदी और अभ्यास में जुट गईं। इस मेहनत का फल 2017 में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में मिला, जहां उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में ओलंपियन हीना सिद्धू के खिलाफ 242.3 का रिकॉर्ड स्कोर बना दिया। उसी वर्ष, मनु 16 साल की उम्र में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतने वाली सबसे युवा भारतीय बन गईं। उन्होंने एशियन जूनियर चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 और विभिन्न आईएसएसएफ वर्ल्ड कप इवेंट्स में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने करियर को लगातार आगे बढ़ाया। टोक्यो ओलंपिक 2020 में उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, लेकिन 2021 आईएसएसएफ वर्ल्ड कप और 2022 वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की। 2024 पेरिस ओलंपिक में मनु ने इतिहास रचते हुए 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि 25 मीटर पिस्टल में चौथा स्थान हासिल किया। इस प्रदर्शन के साथ वह पहली भारतीय एथलीट बनीं, जिन्होंने एक ही ओलंपिक में दो पदक अपने नाम किए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें 2020 में अर्जुन अवॉर्ड और 2024 में ‘मेजर ध्यान चंद खेल रत्न अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। मनु भाकर ने अपने साहस, मेहनत और निरंतरता से भारतीय निशानेबाजी में एक नया अध्याय लिखा है और कम उम्र में ही देश को गौरवान्वित किया है। डेविड/ईएमएस 22 फरवरी 2026