22-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। क्रिकेट में अनुशासन और नियंत्रण किसी भी गेंदबाज की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है, और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान खान इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। तेज गेंदबाजों के लिए नो-बॉल करना आम गलती होती है, लेकिन इमरान ने अपने 21 साल के टेस्ट करियर में 18,644 गेंदें फेंकते हुए एक भी नो-बॉल नहीं की। यह रिकॉर्ड उनकी असाधारण लाइन-लेन्थ और रन-अप नियंत्रण की मिसाल है। टेस्ट क्रिकेट में 362 विकेट और वनडे में 182 विकेट लेने वाले इमरान खान हमेशा अनुशासन और आक्रामकता का संतुलित मिश्रण रहे। इमरान खान ने 3 जून 1971 को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और 2 जनवरी 1992 को श्रीलंका के खिलाफ अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला। वनडे में उन्होंने 1974 में इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआत की और 1992 तक खेलते रहे। अपने करियर में उन्होंने टेस्ट में 3,807 और वनडे में 3,709 रन बनाए। कप्तान और खिलाड़ी दोनों के रूप में उनका योगदान पाकिस्तान क्रिकेट में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 1992 क्रिकेट विश्व कप में इमरान की कप्तानी में पाकिस्तान ने अपना पहला और अब तक का एकमात्र वनडे वर्ल्ड कप जीता। फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ इमरान ने 72 रन की अहम पारी खेली और जावेद मियांदाद ने 58 रन बनाए। इंजमाम-उल-हक और वसीम अकरम के योगदान से पाकिस्तान ने 249 रन का स्कोर खड़ा किया। जवाब में इंग्लैंड दबाव में आ गया और पाकिस्तान ने 22 रन से जीत दर्ज की। क्रिकेट से संन्यास के बाद इमरान ने राजनीति में कदम रखा और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी बने। लेकिन हाल के वर्षों में वे कानूनी विवादों में फंस गए। भूमि भ्रष्टाचार मामले में पाकिस्तानी अदालत ने उन्हें 14 साल की सजा सुनाई, और वर्तमान में वे जेल में हैं। भले ही आज वे कानूनी संकट का सामना कर रहे हों, लेकिन इमरान खान की क्रिकेट विरासत हमेशा याद रहेगी। 21 साल का अनुशासित करियर, नो-बॉल रहित गेंदबाजी और 1992 का विश्व कप जीत उन्हें महान खिलाड़ियों की सूची में स्थायी स्थान दिलाते हैं। वे केवल तेज गेंदबाज नहीं, बल्कि प्रेरणादायक कप्तान और प्रभावशाली ऑलराउंडर भी रहे। डेविड/ईएमएस 22 फरवरी 2026