क्षेत्रीय
22-Feb-2026
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- हर साल 60 हजार करोड़ रुपये स्वाहा नई दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कें रोजाना बढ़ती वाहनों की संख्या के चलते बेहद दबाव में हैं। आए दिन जाम से जूझती जनता शहर के लचर ट्रैफिक के लिए पुलिस और सिस्टम को दोष देती है। कई सड़कों पर बॉटलनेक जैसी स्थिति इस मुसीबत को और बढ़ा रही है। इसके चलते दिल्ली वालों के साल में 60 हजार करोड़ रुपये ईधन समेत अन्य कारणों से स्वाहा हो रहे हैं। आर्थिक रूप के कमजोर वर्ग सालाना 7,200 से 19,600 रुपये तक और उच्च-कुशल श्रमिक 25,900 रुपये तक का नुकसान झेल सकते हैं। ये खुलासा दिल्ली शहरी कला आयोग(डीयूएसी) की कुछ समय पहले आई रिपोर्ट से हुआ है। काम के दिन में सुबह वाहनों की औसत गति 41 और शाम को 56 फीसदी तक कम हो जाती है। डीयूएसी की रिपोर्ट के अनुसार, नांगलोई डिपो, एस-ब्लॉक मंगोलपुरी, आईटीओ जैसे कई चौराहों पर सड़कें संकरी और अव्यवस्थित हैं। यहां बसें, रिक्शा, पैदल यात्री और निजी वाहन एक साथ चलते हैं, जिससे जाम हमेशा बना रहता है। डीयूएसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान जो होता है उसमें समय, ईंधन, प्रदूषण और दुर्घटनाएं शामिल हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/22/फरवरी/2026