- 15 साल से जमे समस्या का नहीं निकला कोई ठोस हल कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिले के प्रमुख जल स्रोत हसदेव दर्री बैराज की स्थिति जलकुंभी के कारण लगातार बिगड़ती जा रही है। बैराज का बड़ा हिस्सा जलकुंभी की सारी सतह से ढक गया है, जिससे यह मैदान जैसा प्रतीत होने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा हैं कि पिछले करीब 15 वर्षों से बैराज की समुचित सफाई नहीं कराई गई है, जिसके कारण जलकुंभी अनियंत्रित रूप से फैलती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले जलकुंभी हटाने के लिए औद्योगिक संस्थान फंड प्रदान करते थे और सफाई अभियान नियमित रूप से किए जाते थे। लेकिन अब आर्थिक सहायता और सरकारी ध्यान के अभाव में स्थिति और बिगड़ गई है। पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश कुमार का कहना है कि जलकुंभी न सिर्फ सौंदर्य को प्रभावित करती है बल्कि यह जल जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। यह पानी की सतह पर मोटी परत बनाकर सूर्य के प्रकाश और ऑक्सीजन को जल में प्रवेश करने से रोक देती है। यह स्थिति जलीय वनस्पतियों और मछलियों के लिए घातक साबित होती है और जलस्तर में तेज गिरावट का कारण बनती है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.एन. साय ने बताया कि मुख्य समस्या यह है कि राखड़ डैम से जलकुंभी बहकर दर्री बैराज तक आती है, और जब तक इसे जड़ से खत्म करने के लिए ठोस रणनीति नहीं बनती, समस्या बनी रहेगी। पिछले वर्षों में भी दर्री बांध में जलकुंभी का फैलाव पहले भी रिकॉर्ड किया जा चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जलकुंभी का दायरा लगभग 13 हेक्टेयर क्षेत्र तक फैल चुका था और तीन वर्षों से सफाई कार्य नहीं हो पाने के कारण स्थिति जटिल हो गई थी। उस समय भी फंड के अभाव को मुख्य कारण बताया गया था। इस बीच मानसून के दौरान दर्री बैराज का जलस्तर भी कई बार प्रभावित हुआ है, जिससे पानी की निकासी के लिए गेट खोले गए और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बन गया। पिछले साल भी हसदेव नदी के जलस्तर में वृद्धि से कई बस्तियों में पानी भर गया था। 22 फरवरी / मित्तल