- अभियान के बाद भी नहीं कम हो रही कुत्तों की संख्या भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल में आवारा श्वानों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। अकेले जेपी अस्पताल में ही प्रतिदिन औसतन 150 से 160 लोग कुत्तों के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। दरअसल, शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कुत्तों ने अपनी टैरेटरी बना ली है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम का नसबंदी कार्यक्रम केवल कागजों तक सीमित है। सडक़ों पर बढ़ती संख्या और उनकी आक्रामकता को रोकने में अमला पूरी तरह विफल है। हिंसक कुत्तों को आबादी से दूर करने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। भोपाल में रोजाना औसतन 14 इलाकों से शिकायतें मिल रही हैं, जो अन्य बड़े शहरों की तुलना में लगभग दोगुनी हैं। यह स्थिति तब है, जब नगर निगम प्रतिदिन 60 से अधिक डॉग पकडऩे का दावा करता है। अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख से ज्यादा स्ट्रीट डॉग हैं। इनमें लगभग 30 हजार मादा डॉग हर वर्ष 70 हजार से अधिक बच्चों को जन्म देती हैं। इसके मुकाबले नगर निगम सालाना केवल 22 से 25 हजार डॉग का नसबंदी (एबीसी) ऑपरेशन कर पाता है। नतीजतन हर वर्ष करीब 45 हजार डॉग की संख्या में शुद्ध बढ़ोतरी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर में हर साल लगभग 70 हजार डॉग का वैक्सीनेशन होना चाहिए, जबकि अभी यह संख्या महज 22 हजार तक सीमित है। इससे रैबीज का खतरा भी बना हुआ है। अपर आयुक्त हर्षित तिवारी के अनुसार, शहर से प्रतिदिन 70 से अधिक डॉग पकडक़र एबीसी सेंटर भेजे जा रहे हैं और टीमों को अधिकतम क्षमता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। रैबीज फ्री सिटी बनाने की कार्ययोजना वर्ष 2030 तक पूरे भोपाल शहर को रैबीज फ्री सिटी बनाने की कार्ययोजना केंद्र सरकार को भेजी गई है, जिसमें हर 10 वार्ड पर एक एबीसी सेंटर की आवश्यकता बताई गई है। वर्तमान में शहर में केवल तीन एबीसी सेंटर संचालित हैं। नगर निगम ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में कुल 12 सेंटर की आवश्यकता जताई थी। हाल ही में प्रदेश सरकार के बजट में दो नए एबीसी सेंटर खोलने की घोषणा की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं होगी। हर टीम में 10-12 कर्मचारी लेकिन क्षमता से कम काम डॉग पकडऩे के लिए निगम की पांच टीमें कार्यरत हैं। प्रत्येक टीम में 10-12 कर्मचारी और एक प्रभारी है। एक वाहन में 20-22 डॉग ले जाने की क्षमता है, लेकिन सभी टीमें मिलकर प्रतिदिन केवल 70 डॉग ही पकड़ पा रही हैं। पूर्ण क्षमता से काम होने पर यह संख्या 100 प्रतिदिन से अधिक हो सकती है। प्रति डॉग खर्च बढ़ेगा, 11.55 करोड़ रुपए बजट प्रस्तावित नगर निगम अभी प्रति डॉग करीब 1000 रुपये खर्च कर रहा है, जिससे सालाना लगभग 2 करोड़ रुपये व्यय हो रहे हैं। आगामी नए प्रस्ताव में प्रति डॉग खर्च बढ़ाकर 1650 रुपये करने की योजना है। इसके लिए करीब 11.55 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट तय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। विनोद / 22 फरवरी 26