लेख
23-Feb-2026
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भारत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह अपने संसाधनों की रक्षा और उपयोग के मामले में अब किसी प्रकार की ढिलाई बरतने वाला नहीं है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बन रहा शाहपुर कंडी बांध अब पूर्णता की ओर है और इसके साथ ही रावी नदी के अतिरिक्त जल के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिलेगा। दशकों से लंबित यह परियोजना न केवल किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगी, बल्कि यह भारत की संप्रभुता और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी प्रतीक बनकर उभरेगी। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल संधि के तहत रावी, व्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का जल भारत को तथा सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का जल पाकिस्तान को दिया गया था। यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में शांति और सहयोग की भावना से किया गया था। भारत ने इस संधि का हमेशा सम्मान किया, जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान ने बार-बार आतंकवाद को बढ़ावा देकर विश्वास की नींव को कमजोर किया। ऐसे में जब भारत अपने हिस्से के जल का समुचित उपयोग सुनिश्चित कर रहा है, तो इसमें किसी भी प्रकार की आपत्ति का कोई औचित्य नहीं बनता। शाहपुर कंडी परियोजना की आधारशिला 1970 के दशक में रखी गई थी और 1980 के दशक में इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस परियोजना की महत्वाकांक्षी परिकल्पना को आगे बढ़ाया था। किन्तु पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच जल बंटवारे और प्रशासनिक विवादों के कारण यह परियोजना 44 वर्षों तक अटकी रही। अंततः 2018 में दोनों राज्यों के बीच समझौता हुआ और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद निर्माण कार्य ने गति पकड़ी। लगभग 3,394 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। इस बांध के पूर्ण होने से रावी नदी का वह अतिरिक्त जल, जो अब तक पाकिस्तान की ओर बह जाता था, उसे भारत अपने कृषि और सिंचाई कार्यों में उपयोग कर सकेगा। पंजाब और जम्मू-कश्मीर के हजारों किसानों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती की स्थिति मजबूत होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा और जल प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा। यह केवल एक बांध नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। विशेषज्ञों का मत है कि यह परियोजना रावी के पूरे प्रवाह को नहीं रोकेगी, बल्कि उस अतिरिक्त जल को नियंत्रित करेगी जो भारत के हिस्से का होते हुए भी उपयोग में नहीं आ पाता था। इस प्रकार यह कदम अंतरराष्ट्रीय संधि के दायरे में रहते हुए भारत के अधिकारों का संरक्षण करता है। पाकिस्तान द्वारा इस पर आपत्ति जताना केवल राजनीतिक बयानबाजी प्रतीत होता है, क्योंकि यह परियोजना पूरी तरह भारत के हिस्से के जल से संबंधित है। भारत ने सदैव शांति और विकास की राह को चुना है, जबकि पाकिस्तान ने कई बार आतंकवाद को अपनी नीति का औजार बनाया है। सीमापार आतंकवादी गतिविधियों, घुसपैठ और भारत के भीतर अस्थिरता फैलाने की कोशिशों ने दोनों देशों के संबंधों को लगातार प्रभावित किया है। ऐसे में जब भारत अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर रहा है, तो यह केवल विकास का निर्णय नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश भी है कि आतंकवाद और उकसावे की नीति अब भारत को रोक नहीं सकती। रावी का जल अब सीमाओं के पार यूं ही बहकर नहीं जाएगा, बल्कि भारतीय खेतों को सींचेगा। यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत की उस परिकल्पना से भी जुड़ा है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित किया जाता है। जल जैसे अमूल्य संसाधन का संरक्षण और प्रबंधन आज की सबसे बड़ी जरूरत है। शाहपुर कंडी बांध इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत ने दशकों तक सिंधु जल संधि का पालन करते हुए पाकिस्तान को उसके हिस्से का जल उपलब्ध कराया, भले ही पाकिस्तान की धरती से पनपने वाले आतंकी संगठनों ने भारत के खिलाफ हिंसा फैलाई। इसके बावजूद भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संयम और जिम्मेदारी का परिचय दिया। परंतु अब समय बदल चुका है। भारत अपनी सुरक्षा और हितों के प्रति पहले से अधिक सजग और दृढ़ है। शाहपुर कंडी परियोजना का पूरा होना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है। यह दर्शाता है कि लंबित परियोजनाओं को राजनीतिक इच्छाशक्ति और समन्वय से पूरा किया जा सकता है। इससे सीमावर्ती इलाकों में विकास को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। आज जब भारत वैश्विक मंच पर एक उभरती शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, तब ऐसे निर्णय उसकी आंतरिक मजबूती को और सुदृढ़ करते हैं। जल प्रबंधन, कृषि विकास और सीमा सुरक्षा इन तीनों क्षेत्रों में यह परियोजना सकारात्मक प्रभाव डालेगी। पाकिस्तान के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अब अपने हिस्से के संसाधनों का पूर्ण उपयोग करेगा और आतंकवाद को किसी भी रूप में सहन नहीं करेगा। अंततः शाहपुर कंडी बांध केवल कंक्रीट और पत्थरों की संरचना नहीं है, बल्कि यह भारत की विकास यात्रा, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। रावी का जल अब भारत की धरती को समृद्ध करेगा और सीमाओं के उस पार बैठे आतंकवाद के समर्थकों को यह समझा देगा कि नया भारत अपने अधिकारों की रक्षा करना जानता है। (वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार स्तम्भकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 23 फरवरी /2026