राष्ट्रीय
23-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान हुए हंगामे पर दिल्ली की एक अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के तरीके की तीखी आलोचना करते हुए इसे असहमति जताने का अनुचित तरीका करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया यह शर्टलेस विरोध प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था पर एक सीधा हमला था, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक छवि को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए चार कार्यकर्ताओं को कोर्ट ने शनिवार को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, बिहार के प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना के नरसिंह यादव शामिल हैं। दिल्ली पुलिस की हिरासत संबंधी अर्जी को स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की कि आरोपी देश के विभिन्न दूर-दराज के इलाकों से ताल्लुक रखते हैं, जिससे उनके फरार होने की आशंका प्रबल है। कोर्ट ने जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों का हवाला देते हुए बताया कि इस घटना के पीछे किसी बाहरी साजिश के संकेत मिल रहे हैं, जो मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ा देते हैं। अदालत के आदेश के अनुसार, इन आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने वैश्विक प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी वाले हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र भारत मंडपम में घुसने की एक सुनियोजित साजिश रची। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर ऐसी टी-शर्ट पहन रखी थीं, जिन पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संदर्भ में प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लिखे थे। पुलिस रिकॉर्ड और मेडिको-लीगल मामलों (एमएलसी) के आधार पर यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डाली गई और पुलिसकर्मियों पर शारीरिक हमले किए गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार सबको है, लेकिन ऐसा आचरण वैध विरोध की सीमाओं का उल्लंघन करता है। समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान इस तरह की हरकतें विदेशी हितधारकों के समक्ष देश की छवि को धूमिल करती हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों के कई सहयोगी फिलहाल फरार हो सकते हैं, जो डिजिटल सबूतों और वित्तीय सुरागों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।गहन जांच की आवश्यकता पर बल देते हुए अदालत ने कहा कि ये अपराध अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए चोट पहुंचाना) और धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब चारों आरोपियों को 25 फरवरी तक पुलिस हिरासत में रहकर पूछताछ का सामना करना होगा। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक विरोध के गिरते स्तर पर भी एक नई बहस छेड़ दी है। वीरेंद्र/ईएमएस/23फरवरी2026