क्षेत्रीय
23-Feb-2026
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- 24 फरवरी को कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी जाएगी अंतिम चेतावनी गुना (ईएमएस)। जिले के प्रसिद्ध और प्राचीन केदारनाथ शिवधाम (महोदरा) में विगत तीन वर्षों से दर्शन-पूजन बंद होने के कारण श्रद्धालुओं का धैर्य अब जवाब दे गया है। महाभारत कालीन इस पवित्र गुफा मंदिर को खुलवाने के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को मंदिर परिसर में आयोजित 40 गांवों की महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 24 फरवरी को हजारों की संख्या में श्रद्धालु पुरानी तहसील परिसर में एकत्रित होंगे और कलेक्टर को अंतिम चेतावनी पत्र सौंपेंगे। लाखों की आस्था पर चोट, 40 गांवों के प्रतिनिधियों ने भरी हुंकार महोदरा ग्राम पंचायत स्थित केदारनाथ धाम न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, बल्कि लाखों लोगों की अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। बैठक में वक्ताओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन ने पिछले तीन वर्षों से मंदिर के पट बंद कर रखे हैं, जिससे भगवान भोलेनाथ के भक्त अपने आराध्य के दर्शनों से वंचित हैं। यह न केवल पूजा के अधिकार का हनन है, बल्कि उन हजारों लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है जो यहाँ पवित्र कुंड में अपने पूर्वजों का अस्थि विसर्जन करने और धार्मिक अनुष्ठान करने आते हैं। 24 फरवरी को अंतिम चेतावनी: उग्र आंदोलन की तैयारी बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि 24 फरवरी को सौंपा जाने वाला ज्ञापन शासन-प्रशासन के लिए अंतिम चेतावनी होगी। यदि इसके बाद भी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले गए, तो क्षेत्र की जनता उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम उठाने को मजबूर होगी। आयोजकों ने जिले के समस्त शिव भक्तों से अपील की है कि वे मंगलवार को शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी ढंग से अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें ताकि सोए हुए प्रशासन को जगाया जा सके। महारथी जुटे: महापंचायत में यह रहे मौजूद इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत सदस्य संतोष किरार, बजरंगगढ़ मंडल अध्यक्ष मुनेश धाकड़, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला मंत्री प्रिया चरण धाकड़ और सरपंच मनीष बारेला (महोदरा) विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही राजाराम धाकड़ भिड़रा, पवन रघुवंशी (सरपंच जमरा), भवेंद्रराज सिसोदिया (सरपंच भदौरा), गिर्राज (सरपंच भिड़रा), सूरज (सरपंच सोनकारा), विजय सिंह मारकी महू, मथुरा लाल धाकड़ रतनपुर, अवधेश धाकड़ और मोहन नायक सहित 40 गांवों के सरपंचों और प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। - सीताराम नाटानी