क्षेत्रीय
23-Feb-2026
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- हाईकोर्ट ने दिए फिर से ट्रायल के आदेश - ट्रायल कोर्ट को छह माह में पुन: सुनवाई पूरी करने का आदेश बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधी फैसला देते हुए आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया है और मामले में पुन: परीक्षण (री-ट्रायल) का आदेश दिया है। यह मामला उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने हत्या के आरोपी सरगुजा जिले के झिरमिट्टी निवासी लक्ष्मण राम नामक अभियुक्त से जुड़ा हुआ है। उसे सत्र न्यायालय, अंबिकापुर द्वारा हत्या (धारा 302) के आरोप में दोषी ठहराया गया था। आरोपी ने इस निर्णय के विरुद्ध वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने लखन राम को दी गई आजीवन कारावास की सजा को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि ट्रायल कोर्ट का मूल रिकॉर्ड गुम हो चुका है और अपील की सुनवाई बिना पूर्ण रिकॉर्ड के संभव नहीं है। रिकॉर्ड गुम, सुनवाई असंभव अपील की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड गुम हो गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण का प्रयास किया गया, लेकिन गवाहों के बयान और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सके। राज्य द्वारा कुछ दस्तावेज जैसे एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेमो, जब्ती पंचनामा आदि प्रस्तुत किए गए, लेकिन अभियोजन एवं बचाव पक्ष के गवाहों के बयान न मिलने के कारण अपील पर निर्णय करना संभव नहीं था। पुन: ट्रायल ही एकमात्र उपाय न्यायालय ने कहा कि, दोषसिद्धि की पुष्टि के लिए अपीलीय न्यायालय द्वारा संपूर्ण रिकॉर्ड का अवलोकन अनिवार्य है। रिकॉर्ड के अभाव में दोषसिद्धि को बरकरार रखना कानूनसम्मत नहीं है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि रिकॉर्ड पुनर्निर्माण संभव न हो, तो न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करते हुए पुन: ट्रायल ही एकमात्र उपाय है। री-ट्रायल का आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने दोषसिद्धि व सजा के आदेश को निरस्त कर दिया है और मामले को पुन: ट्रायल के लिए ट्रायल कोर्ट को भेजा है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को 6 माह के भीतर पुन: सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मनोज राज 23 फरवरी 2026