- बिना इस टेस्ट के नहीं चढ़ेगा खून, जानें क्या है सरकार का ये नया नियम भोपाल (ईएमएस)। सतना जिले में कुछ महीने पहले घटित एक घटना की वजह से मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मोहन सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक को लेकर एक नई पॉलिसी लागू कर दी है। इस नई पॉलिसी के तरह मरीजों को ब्लड बैंक से तभी खून दिया जाएगा जब उनकी एनएटी मशीन से जांच पूरी कर ली जाएगी। एनएटी मतलब (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) हैं। दरअसल पिछले साल दिसंबर के महीने में सतना जिला अस्पताल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया था। यहां पर चार थैलीसीमिया पीडि़त बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था। जिसके बाद पूरे जिले में अफरा-तफरी मच गई थी। सतना में हुई इस घटना के बाद से ही सरकार सतर्क मोड पर है और ऐसी घटना आगे फिर कभी सामने न आए इसलिए एनएटी टेस्ट को अनिवार्य कर दिया गया है। एनएटी मशीन खून की जांच बारीकी से करता है इसे सरल शब्दो में कहा जाए तो जब तक डोनर के खून का एनएटी टेस्ट नहीं हो जाता तब तक उसे ब्लड बैंक में नहीं लिया जाएगा और नहीं किसी जूरुरतमंद को दिया जाएगा। वर्तमान में खून की चांच साधारण किट से होती थी लेकिन अब खून की जांच बारीकी से होगी और ये काम करेगा एनएटी। एनएटी मशीन खून की जांच बारीकी से करता है जिसमें हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस जैसे गंभीर रोग का पता चलता है। मात्र 15 दिनों में चल जाएगा पता इस जांच के द्वारा मात्र 15 दिनों में पता लगाया जा सकता है कि डोनर का खून बीमारी रहित है या नहीं। बता दें कि भोपाल और इंदौर के सरकारी अस्पतालों में ये मशीन पहले से ही मौजूद है लेकिन अब संभागीय मुख्यलयों स्थित बड़े अस्पतालों में भी ये मशीन नजर आएगी। हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि इन अस्पतालों में ये मशीन सरकार की तरफ से नहीं बल्कि बड़ी प्राइवेट कंपनियों की तरफ से इंस्टॉल की जाएंगी। मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले से उम्मीद है कि अब जरूरतमंद मरीज को सुरक्षित और संक्रमण से मुक्त खून मुहैया होगा जिसे भविष्य में सतना जैसी स्थिति पैदा न हो। विनोद / 24 फरवरी 26