वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं साबित हो रहा है। पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ‘टैरिफ वाली मनमानी’ पर लगाम लगाकर उन्हें करारी शिकस्त दी। अब भारत के दोस्त यूरोपियन यूनियन ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से झटका खाने के बाद बौखलाहट में जो नया टैरिफ बम फोड़ा है, इस बम ने यूरोप के सब्र का बांध तोड़ दिया है। यूरोपियन यूनियन से अब वाशिंगटन को सीधी और दो-टूक चेतावनी दे दी गई है, वादा तब वादा होता है, और हर हाल में निभाना पड़ेगा। इस कहानी की शुरुआत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले से होती है, जिसमें ट्रंप के लाए गए ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी बताया। अमेरिकी कोर्ट ने साफ कहा कि 1977 के इमरजेंसी कानून की आड़ में मनमाने टैक्स नहीं थोप सकते है। एक आम नेता शायद इस झटके के बाद शांत हो जाता, लेकिन ट्रंप अपनी ईगो पर लगी इस चोट से तिलमिला उठे और ट्रंप ने 1974 के एक पुराने ट्रेड एक्ट का सहारा लेकर दुनिया भर पर अचानक 15 प्रतिशत का नया बेसलाइन टैरिफ ठोक दिया। उनका यह दांव भले ही अमेरिका के अंदर उन्हें स्ट्रॉन्गमैन दिखा रहा हो, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में इस टैक्स ने रायता फैला दिया है। ट्रंप के इस नए 15 प्रतिशत वाले फरमान ने सबसे ज्यादा आग यूरोप में लगाई है। यूरोपियन कमीशन, ने अमेरिका को साफ अल्टीमेटम दे दिया है। यूरोप ने कहा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार किसी की मर्जी और सनक से नहीं, बल्कि नियमों और समझौतों से चलता है। पिछले ही साल अगस्त 2025 में अमेरिका और ईयू के बीच एक शानदार डील हुई थी। यह कोई छोटी-मोटी डील नहीं थी, 2024 में इन दोनों के बीच 1.7 ट्रिलियन यूरो का व्यापार हुआ था। यूरोपियन कमीशन ने अपना गुस्सा जाहिर कर बयान दिया है, उसका लब्बोलुआब यही है कि हमने जो डील की थी, हम उस पर कायम हैं। अब अमेरिका को तय करना है कि वह अपनी जुबान का पक्का है या नहीं। ट्रंप जिस ‘टर्नबेरी एग्रीमेंट’ को इतिहास की सबसे बड़ी व्यापारिक जीत बताकर सीना ठोकते थे, अब वही डील कूड़ेदान में जाने की कगार पर है। इस समझौते के तहत यूरोप ने अमेरिका को बहुत कुछ देने का वादा किया था। अमेरिका से 750 अरब डॉलर का तेल और गैस खरीदना। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 600 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश। अमेरिकी सेना के हथियारों और डिफेंस इक्विपमेंट की बंपर खरीददारी करना। लेकिन अब यूरोपीय संसद के बड़े नेता और व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्नड लांगे ने ट्रंप की इस हरकत को टैरिफ की महा-अफरातफरी करार दिया है। लागे इतने गुस्से में हैं कि उन्होंने इस पूरी ट्रेड डील पर ही ब्रेक लगाने का प्रस्ताव दे दिया है। उनका कहना है कि जब अमेरिका ही अपने वादे पर नहीं टिक रहा, तब यूरोप अपनी तरफ से अरबों डॉलर क्यों लुटाए? अगर आपको लग रहा है कि यूरोप सिर्फ बयानबाजी कर रहा है, आप गलत हैं। यूरोपियन यूनियन के पास एक ऐसा कानूनी हथियार है, जो अमेरिकी कंपनियों की कमर तोड़ सकता है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को यूरोप के किसी भी सरकारी टेंडर से ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।अमेरिका से आने वाले फार्मास्यूटिकल्स, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और कारों पर यूरोप पाबंदी लगा सकता है। अमेरिका के लिए यूरोप के 45 करोड़ ग्राहकों वाले विशाल और अमीर बाजार के दरवाजे हमेशा के लिए बंद किए जा सकते हैं। आशीष/ईएमएस 25 फरवरी 2026