राष्ट्रीय
25-Feb-2026
...


नई दिल्ली(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजराइल यात्रा को लेकर देश में राजनीतिक पारा गरमा गया है। बुधवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस दौरे पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर जोरदार हमला बोला। विपक्षी दल का कहना है कि एक ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों और गाजा में सैन्य कार्रवाई की आलोचना हो रही है, पीएम मोदी का उन्हें गले लगाना भारत की स्थापित विदेश नीति और नैतिकता के खिलाफ है। कांग्रेस ने इस मुलाकात को नैतिक कायरता करार देते हुए आरोप लगाया कि भारत सरकार ने फिलिस्तीनी नागरिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। वहीं सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें आशा है कि प्रधानमंत्री वहां हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के नरसंहार का उल्लेख करेंगे और उनके लिए न्याय की मांग उठाएंगे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी इजराइली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा के भयावह हालात पर चर्चा करेंगे। प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें आशा है कि प्रधानमंत्री वहां हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के नरसंहार का उल्लेख करेंगे और उनके लिए न्याय की मांग उठाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत का इतिहास हमेशा सत्य, शांति और न्याय के साथ खड़े होने का रहा है और प्रधानमंत्री को इस मंच का उपयोग दुनिया को वही रोशनी दिखाने के लिए करना चाहिए। इधर, कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अपने इजरायली समकक्ष को बेशर्मी से गले लगा रहे हैं, जबकि नेतन्याहू पर गाजा को मलबे में तब्दील करने और वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों के विस्तार के गंभीर आरोप हैं। रमेश ने भारत के गौरवशाली इतिहास और फिलिस्तीन के प्रति पुरानी एकजुटता की याद दिलाते हुए कई ऐतिहासिक संदर्भ साझा किए। उन्होंने याद दिलाया कि 20 मई 1960 को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गाजा का दौरा कर वहां तैनात संयुक्त राष्ट्र की भारतीय टुकड़ी से मुलाकात की थी। साथ ही, उन्होंने 29 नवंबर 1981 को फिलिस्तीन के सम्मान में जारी डाक टिकट और 18 नवंबर 1988 को भारत द्वारा फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में दी गई औपचारिक मान्यता का भी जिक्र किया। रमेश के अनुसार, वर्तमान सरकार की नीतियां पाखंडपूर्ण हैं और यह केवल दिखावे के लिए फिलिस्तीनियों के समर्थन की बात करती है। पीएम मोदी की दूसरी इजराइल यात्रा विपक्ष ने मंगलवार को भी सरकार की घेराबंदी करते हुए कहा था कि गाजा में नागरिकों पर इजरायल के लगातार हो रहे हमलों के बावजूद प्रधानमंत्री का वहां जाना यह साबित करता है कि भारत ने अपने पुराने रुख से पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर इस यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले नौ वर्षों में यह पीएम मोदी की दूसरी इजराइल यात्रा है, जिसका उद्देश्य रक्षा और व्यापारिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना है। 2017 की ऐतिहासिक यात्रा के बाद से दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। जहाँ सरकार इसे भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और सुरक्षा हितों के लिहाज से अहम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मानवाधिकारों और भारत की पारंपरिक तटस्थता की अनदेखी मान रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/25फरवरी2026 -----------------------------------