नई दिल्ली(ईएमएस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने महीनों की खामोशी के बाद एक ऐसा कदम उठाया है जिसने ढाका के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जुलाई 2024 के तख्तापलट और हिंसक विद्रोह के बाद भारत में शरण लेने वाली शेख हसीना ने अब अपने वतन लौटने की तैयारी का स्पष्ट संकेत दे दिया है। दिल्ली से अपनी पार्टी, आवामी लीग के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मानसिक और शारीरिक रूप से संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा, बोरिया-बिस्तर बांध लो, अब देश लौटने और मैदान में उतरने का वक्त आ गया है। शेख हसीना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने उन पर कई गंभीर मुकदमे दर्ज किए हैं और उनकी पार्टी पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान हसीना ने न केवल अपनी वापसी का संकल्प दोहराया, बल्कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अपनी पार्टी पर लगाए गए प्रतिबंधों को पूरी तरह अवैध करार देते हुए कहा कि जो सरकार खुद गैर-कानूनी तरीके से सत्ता में आई है, उसके आदेशों का कोई संवैधानिक महत्व नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आवामी लीग पर से प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो पार्टी अपनी रणनीति खुद तय करेगी और कड़े कदम उठाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री ने हाल ही में बांग्लादेश में संपन्न हुए चुनावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक मजाक करार दिया। उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर वोटिंग का बहिष्कार किया था और प्रशासन द्वारा जारी किए गए 60 प्रतिशत मतदान के आंकड़े पूरी तरह फर्जी हैं। हसीना ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले ही बैलेट बॉक्स भर दिए गए थे ताकि उनकी पार्टी को सत्ता से बाहर रखा जा सके। उन्होंने सीधे तौर पर तारिक रहमान के प्रभाव वाली व्यवस्था को चुनौती देते हुए कहा कि आवामी लीग के साथ घोर नाइंसाफी हुई है। शेख हसीना के इस कड़े रुख ने ढाका की अंतरिम सरकार और विपक्षी दलों की चिंता बढ़ा दी है। उनके समर्थकों के लिए यह बयान एक संजीवनी की तरह देखा जा रहा है, वहीं विरोधियों का मानना है कि उनकी वापसी से देश में फिर से अस्थिरता पैदा हो सकती है। शेख हसीना ने अपने संबोधन के अंत में कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एकजुट होकर सड़कों पर उतरें और लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष करें। अब देखना यह है कि इस एलान के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार क्या कूटनीतिक और कानूनी कदम उठाती है। वीरेंद्र/ईएमएस/25फरवरी2026