क्षेत्रीय
25-Feb-2026
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- जिस प्रत्याशी का नाम मेरिट सूची में ही नहीं, उसका चयन किया बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश दिया कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में अनुभव संबन्धी नियम नहीं बदले जा सकते। कृषि विभाग में संविदा पद के लिए चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में मनमानी की गई है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अधिकारी किसी उम्मीदवार के अनुभव प्रमाणपत्र को केवल इसलिए खारिज नहीं कर सकते या उसके अंक नहीं काट सकते क्योंकि वह किसी निजी संस्थान से है, बशर्ते मूल विज्ञापन में सरकारी या अर्ध-सरकारी अनुभव की कोई विशिष्ट मांग न की गई हो। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के अंक बहाल करें और मूल मेरिट सूची के आधार पर उसकी नियुक्ति पर विचार करें। यह है मामला 6 मार्च, 2023 को, उप संचालक कृषि-सह-परियोजना प्रबंधक, डब्ल्यूसीडीसी जिला बलरामपुर-रामानुजगंज ने तातापानी माइक्रो वाटरशेड समिति में सचिव के एक अनारक्षित संविदा पद को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता सत्यम गुप्ता ने इस पद के लिए आवेदन किया और अपने शैक्षिक दस्तावेजों के साथ एक निजी संस्थान (मिरर एकेडमी कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर) से प्राप्त अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। आवेदनों की जांच के बाद, अधिकारियों ने तीन उम्मीदवारों की एक प्रारंभिक मेरिट सूची प्रकाशित की। याचिकाकर्ता को 67.9 अंकों के साथ पहले स्थान पर रखा गया था, जिसमें उसके अनुभव के लिए दिए गए अंक भी शामिल थे। मेरिट से बाहर आवेदक का चयन कर लिया समिति ने कई दौर के दस्तावेज़ सत्यापन के बावजूद, तातापानी समिति के लिए अंतिम नियुक्ति को आश्चर्यजनक रूप से विचाराधीन रखा गया। इसके कुछ समय बाद एक नई चयन सूची प्रकाशित की गई जिसमें एक नए उम्मीदवार, दिलीप कुमार एक्का को 65.11 अंकों के साथ चयनित घोषित किया गया। चौंकाने वाली बात यह थी कि यह उम्मीदवार प्रारंभिक शीर्ष-तीन मेरिट सूची में था ही नहीं। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के अनुभव के अंक काट लिए गए जिससे उसका स्कोर घटकर 62.9 अंक रह गया और उसे प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया। इस अचानक किए गए बदलाव को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। राज्य शासन ने निजी संस्थान के अनुभव प्रमाणपत्र को किया अमान्य याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अंतिम चयन सूची में दिलीप को अचानक शामिल करना पूरी तरह से अवैध और मनमाना कदम था, खासकर तब जब वह शुरुआती मेरिट सूची के शीर्ष तीन उम्मीदवारों में भी शामिल नहीं था। याचिकाकर्ता ने मेरिट सूची के शीर्ष पर अपना नाम बहाल करने और अपनी नियुक्ति का आदेश जारी करने की मांग की। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के अनुभव के अंकों में कटौती को यह कहते हुए सही ठहराया कि उसका प्रमाण पत्र एक निजी संस्थान से था, जबकि इसे किसी सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थान का होना चाहिए था। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को अवैध पाया न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की पीठ ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाईं। कोर्ट ने देखा कि जब प्रारंभिक मेरिट सूची तैयार की गई थी, तब प्रतिवादी नंबर 4 दिलीप चयन प्रक्रिया की दौड़ में भी नहीं था। कोर्ट ने टिप्पणी की-उपरोक्त तथ्य प्रथम दृष्टया दर्शाते हैं कि प्रतिवादी दिलीप एक्का का चयन अवैध साधन अपनाकर किया गया है और इसलिए, उसका चयन टिकने योग्य नहीं होगा। कोर्ट ने विज्ञापन की शर्तों की जांच की और अनुभव प्रमाण पत्र के संबंध में राज्य के बचाव को सिरे से खारिज कर कहा कि पद के विज्ञापन ऐसा कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं है कि अनुभव सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थान का होना चाहिए। चयन सूची में रखे जाने के लिए पात्रता मानदंड, जो भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत में अधिसूचित किए गए थे, भर्ती प्रक्रिया के बीच में नहीं बदले जा सकते। याचिकाकर्ता के चयन का आदेश हाईकोर्ट ने सत्यम की याचिका को स्वीकार कर फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता को उसके अनुभव के लिए पहले दिए गए 5 अंकों को वापस जोड़ा जाना चाहिए, जिससे उसका कुल स्कोर पुन: 67.9 अंक हो जाए। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से दिलीप के चयन को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि चयन सूची में उसका सीधा प्रवेश बिना किसी स्पष्टीकरण के था और यह कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। नतीजतन, कोर्ट ने प्रतिवादी अधिकारियों को आदेश दिया कि वे 14 अगस्त, 2024 की प्रारंभिक मेरिट सूची के आधार पर याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर विचार करें, उसके अनुसार चयन सूची प्रकाशित करें और नियुक्ति आदेश जारी करें। मनोज राज 25 फरवरी 2026