26-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के विरुद्ध लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है। इस संबंध में जारी नए आदेश के तहत समिति की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इस उच्चस्तरीय जांच समिति में पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मणींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल थे। अब नए आदेश के अनुसार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मणींद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। इस बदलाव का मुख्य कारण प्रशासनिक और व्यावहारिक है। दरअसल, जस्टिस मणींद्र मोहन श्रीवास्तव आगामी 6 मार्च को 62 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने वाले हैं। चूंकि मामले की जांच अभी प्रक्रियाधीन है और इसके निष्कर्ष तक पहुंचने में समय लग सकता है, इसलिए जांच की निरंतरता बनाए रखने के लिए समिति का पुनर्गठन करना आवश्यक हो गया था। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ यह मामला पिछले साल तब तूल पकड़ा था, जब 14 मार्च को दिल्ली में उनके आधिकारिक आवास पर जले हुए नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं। इस घटना के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से हटाकर उनके मूल कैडर, इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 21 जुलाई को भाजपा के रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित 146 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को उन्हें पद से हटाने (महाभियोग) का प्रस्ताव सौंपा था। 12 अगस्त, 2025 को इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के साथ ही संवैधानिक प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई। भारत के संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, हाईकोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। संविधान के अनुच्छेद 218 और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत, महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष को एक तीन सदस्यीय समिति का गठन करना होता है। इस समिति में अनिवार्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद शामिल होते हैं। यह समिति आरोपों की सूक्ष्मता से जांच कर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है। वीरेंद्र/ईएमएस/26फरवरी2026