- वादाखिलाफी से ग्रामीणों का टूटा धैर्य कोरबा (ईएमएस) सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की गेवरा कोयला मेगा परियोजना अंतर्गत ग्राम नरईबोध और मनगाँव के ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे गया है। कोयला खनन के कारण विस्थापित और प्रभावित हुए ग्रामीणों ने प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगा उसके विरोध में 27 फरवरी से गेवरा खदान और पी.एन.सी. कंपनी के कार्य को अनिश्चितकालीन बंद करने की घोषणा कर दी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पी.एन.सी. कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के उनके पूर्वजों के मठों (धार्मिक आस्था स्थलों) को खोदकर फेंक दिया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार और उचित मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में 10 फरवरी को ग्रामीणों ने खदान बंद करने की चेतावनी दी थी, उस दौरान 9 फरवरी को गेवरा प्रबंधन पी.एन.सी. कंपनी और ग्रामीणों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। बैठक में प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था कि एक सप्ताह के भीतर पात्र ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा और पूर्वजों के मठों (धार्मिक आस्था स्थलों) के मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लिखित आश्वासन दिए हुए लगभग दो सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रबंधन ने अभी तक एक भी कदम नहीं उठाया है। प्रबंधन पर इस उदासीन रवैये का आरोप लगा आक्रोशित होकर सैकड़ों ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर सूचित कर दिया है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुई, तो 27 फरवरी से गेवरा खदान में उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप्प कर दिया जाएगा इसकी समस्त जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी। # प्रमुख मांगेंः- * वैकल्पिक रोजगारः- पूर्व के समझौते के अनुसार स्थानीय युवाओं को तत्काल रोजगार दिया जाए। * मुआवजाः- क्षतिग्रस्त मठों और धार्मिक स्थलों का उचित मुआवजा तत्काल प्रदान किया जाए। * स्वास्थ्य सुरक्षाः- क्षेत्र में उड़ रही धूल-डस्ट से हो रही गंभीर बीमारियों के रोकथाम के उपाय किए जाएं। 26 फरवरी / मित्तल