क्षेत्रीय
27-Feb-2026


बिलासपुर (ईएमएस)। आंगनबाड़ी और खेत में करंट लगने से 2 बच्चों की मौत के मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शासन की ओर से बच्चों के परिजन को मुआवजा दिए जाने की जानकारी दी गई। कोर्ट ने मामला मॉनिटरिंग के लिए रखते हुए सुनवाई बड़ा दी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। पूर्व में कोर्ट ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन को नोटिस जारी किया था। दोनों घटनाओं को गंभीर लापरवाही मानते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कार्ययोजना और नीति बनाई जाए। आज शासन की ओर से बताया गया कि खेत में मौत पर चार लाख और आंगनबाड़ी में हुई मौत पर परिजन को 1 लाख रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। करंट से लगातार मौत पर कोर्ट ने जताई है चिंता पहली घटना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की है। जहां करगीकला गांव में 6 साल के बच्चे की खेत के पास खेलते हुए करंट लगने से मौत हो गई थी। जबकि दूसरी घटना कोंडागांव जिले की है। जहां आंगनबाड़ी में करंट की चपेट में आने से ढाई साल की बच्ची महेश्वरी यादव की जान चली गई थी। मृत बच्चों के परिजनों को मुआवजे के निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य में खेतों में बाड़ पर बिजली का करंट लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे इंसान के अलावा पशु और वन्यजीवों की मौत हो रही हैं। बरसात के मौसम में यह और भी खतरनाक हो जाता है। पानी भरने से पूरा इलाका करंट की चपेट में आ सकता है। कोर्ट की नाराजगी के बाद शासन ने लिया एक्शन हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन महाधिवक्ता ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी। इसके कुछ घंटों के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक पीएस एल्मा ने सभी जिलों के कलेक्टर और महिला बाल विकास अधिकारियों को चि_ी लिखी थी कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 साल तक के बच्चे रोजाना आते हैं। माता-पिता उन्हें सुरक्षित मानकर भेजते हैं, लेकिन इस तरह की लापरवाही बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। इसलिए विभागीय अधिकारियों, कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी का यह दायित्व है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सभी केंद्रों का गहन निरीक्षण करें और सुरक्षा की पूरी गारंटी दें। मनोज राज 27 फरवरी 2026