बिलासपुर (ईएमएस)। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि स्कूल परिसर में जबरन घुसना अपराध है। रायपुर के निजी स्कूल परिसर में प्रवेश करने, नारे लगाने और कर्मचारियों को गाली देने के आरोपी एनएसयूआई सदस्य के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के तहत स्कूल भवन घर में अनाधिकृत प्रवेश के दायरे में आ सकता है। आरोप तय करने के चरण में हस्तक्षेप न करते हुए, न्यायालय ने एक स्थापित सिद्धांत पर जोर दिया कि प्रारंभिक चरण में, न्यायालयों को केवल यह आकलन करना चाहिए कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। यह है मामला प्रकरण रायपुर के एक निजी स्कूल में हुई घटना से जुड़ा है। आरोप के अनुसार एनएसयूआई कथित सदस्य स्कूल कृष्णा किड्स अकादमी परिसर में घुस गए और नारे लगाने लगे। शिकायतकर्ता, जो स्कूल के प्रशासक हैं, ने दावा किया कि जब उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो याचिकाकर्ता और अन्य लोगों ने उन्हें गाली दी और महिला कर्मचारियों के साथ दुव्र्यवहार किया। एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच शुरू हुई और आरोपपत्र दाखिल किया गया। निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता के तहत घर में जबरन घुसने और मारपीट की तैयारी करने तथा अश्लील भाषा का प्रयोग करने सहित कई आरोप तय किए। पुनरीक्षण याचिका खारिज होने के बाद आरोपी ने कार्रवाई रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कार्रवाई को याचिकाकर्ता ने द्वेषपूर्ण कहा याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ प्रतिशोधात्मक शिकायत की गई। यह तर्क भी दिया गया कि स्कूल को आवासीय मकान के समान नहीं माना जा सकता है, इसलिए मकान में घुसपैठ के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि निचली अदालतों ने साक्ष्यों की उचित जांच किए बिना यांत्रिक रूप से आरोप तय किए थे, और कार्यवाही जारी रखना प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। राज्य शासन ने कहा- अवैध प्रवेश, दुव्र्यवहार साबित राज्य ने जवाब में कहा कि शिकायतकर्ता और स्कूल कर्मचारियों सहित कई गवाहों के बयान अवैध प्रवेश, नारेबाजी और मौखिक दुव्र्यवहार के आरोपों का समर्थन करते हैं। आरोप तय करने के चरण में, अदालत को सबूतों का बारीकी से मूल्यांकन करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि केवल यह निर्धारित करना है कि अपराध होने की आशंका के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री स्पष्ट रूप से इस मानदंड को पूरा करती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर आरोपी की याचिका खारिज कर दी। मनोज राज 27 फरवरी 2026