27-Feb-2026


* विधानसभा में अमित चावड़ा बोले – डबल इंजन सरकार सामाजिक न्याय पर दे स्पष्ट जवाब अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात विधानसभा में बजट आवंटन को लेकर उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस के विधायकों ने एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, सफाईकर्मी, दिव्यांग, पशुपालक और विमुक्त जातियों के लिए बनाए गए विभिन्न बोर्ड-निगमों को कम राशि आवंटित करने के विरोध में वॉकआउट किया। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समाज, सफाईकर्मी, दिव्यांग, पशुपालक (गोपलक) और घुमंतू-विमुक्त जातियों के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि इन वर्गों का शोषण हो रहा है, फिर भी सरकार उनकी सहायता के लिए गंभीर नहीं है। चावड़ा ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए जवाबों का हवाला देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अंतर्गत कार्यरत विभिन्न निगमों को पिछले दो वर्षों में जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम बजट दिया गया और उसमें से भी बड़ी राशि खर्च ही नहीं की गई। प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं: गुजरात अनुसूचित जाति विकास निगम को 2024 में 26.60 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिसमें से 25.70 करोड़ खर्च हुए, जबकि 0.89 करोड़ शेष रहे। 2025 में 28.78 करोड़ में से 23.30 करोड़ खर्च हुए और 5.48 करोड़ अप्रयुक्त रहे। डॉ. आंबेडकर अनुसूचित जाति विकास निगम को 2024 में 11.40 करोड़ में से 5.18 करोड़ खर्च हुए और 6.31 करोड़ शेष रहे। 2025 में 11.86 करोड़ आवंटन के मुकाबले 17.02 करोड़ खर्च दर्शाए गए। गुजरात सफाई कामदार विकास निगम को 2024 में 76.50 करोड़ में से 55.07 करोड़ खर्च हुए, जबकि 21.43 करोड़ शेष रहे। 2025 में 46.30 करोड़ में से 41.35 करोड़ खर्च हुए। गुजरात अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम में 2024 में 22.80 करोड़ में से 13.67 करोड़ खर्च हुए। 2025 में 18.26 करोड़ में से 10.09 करोड़ खर्च हुए, यानी लगभग 40% राशि अप्रयुक्त रही। गुजरात राज्य दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम को 2025 में 3.85 करोड़ आवंटित हुए, जिसमें से केवल 0.50 करोड़ खर्च किए गए और 3.34 करोड़ शेष रहे। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि बजट आवंटन का आधार क्या है? क्या यह सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति के अनुसार तय किया जाता है? यदि बजट दिया जाता है तो उसका 40 से 50 प्रतिशत तक उपयोग क्यों नहीं हो पाता? अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा में इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने से बच रही है। उन्होंने मांग की कि भेदभाव और अन्याय को बंद कर पारदर्शी तरीके से बजट आवंटन और खर्च का पूरा विवरण दिया जाए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि भाजपा के कई विधायक स्वयं एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज से आते हैं, फिर भी वे अपने समाज के अधिकारों की आवाज उठाने के लिए आगे नहीं आते। सतीश/27 फरवरी