भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा गुजरता नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से कड़े संकेतों के बाद आशंका है कि यदि सैन्य टकराव होता हैं तब ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर सकता है। यह वहीं समुद्री मार्ग है, जिससे होकर भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण “ऑयल चोक पॉइंट” माना जाता है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। एशियाई देशों खासकर इंडिया और चीन के लिए यह जीवनरेखा है। अमेरिका की अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) के अनुसार, 2024-25 में प्रतिदिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस मार्ग से गुजरे है। बात दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। खाड़ी देशों से आने वाला तेल मुख्य रूप से इसी मार्ग से गुजरता है। हालांकि रूस से आने वाला तेल होर्मुज से नहीं गुजरता, लेकिन खाड़ी सप्लाई रुकने से वैश्विक कीमतें उछल सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ेगा। अगर होर्मुज बंद होता हैं तब क्या होगा इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। भले ही भारत को वैकल्पिक स्रोत मिल जाएं, लेकिन वैश्विक कीमतों में तेज उछाल तय माना जाता है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा, चालू खाता घाटा (सीएडी) बढ़ सकता है। इसके बाद ईंधन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स महंगे होगा, जिससे मंहगाई बढ़ेगी और आम जनता पर इसका सीधा असर होगा। युद्ध क्षेत्र घोषित होने पर जहाजों के बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ जाते हैं। क्या विकल्प हैं भारत के पास? सऊदी अमराको पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन (5 मिलियन बैरल/दिन क्षमता) चलाता है, जो लाल सागर तक जाती है। यूएई की 1.8 मिलियन बैरल/दिन क्षमता वाली पाइपलाइन फुजैराह तक तेल पहुंचाती है, जो होर्मुज को बाईपास करती है। लेकिन इनकी क्षमता सीमित है पूरी खाड़ी सप्लाई को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। भारत के पास आपातकालीन भंडार मौजूद हैं, जो कुछ हफ्तों की जरूरत पूरी कर सकते हैं। भारत ने रूस, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात बढ़ाकर जोखिम कम करने की कोशिश की है। यदि होर्मुज बाधित होता है, तब इसका असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे बड़े आयातक भी प्रभावित होगा। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी। आशीष/ईएमएस 28 फरवरी 2026