नई दिल्ली,(ईएमएस)। जब भी भारतीय संविधान के निर्माण की चर्चा होती है, बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम सबसे पहले आता है। संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका अतुलनीय है। लेकिन इस महान दस्तावेज की रचना के पीछे एक ऐसा व्यक्तित्व भी था, जिसने पर्दे के पीछे रहकर संविधान की नींव तैयार की थी। वे थे संवैधानिक सलाहकार बेनेगल नरसिंह राव, जिन्हें दुनिया बी.एन. राव के नाम से जानती है। 1887 में मैंगलोर में जन्मे बी.एन. राव एक असाधारण मेधावी छात्र थे। उनके पिता एक डॉक्टर और शिक्षाविद थे। राव ने 1910 में भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की, जो उस दौर में सबसे कठिन मानी जाती थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू उन्हें बेहद चतुर और बुद्धिमान व्यक्ति मानते थे। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने 1930 के दशक में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट में संशोधन पर काम किया और बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बने। 1944 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।1947 में जब संविधान निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई, तो बी.एन. राव को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया। अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड और कनाडा की यात्राएं कीं। उन्होंने वहां के कानूनविदों और जजों से मुलाकात की ताकि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लोकतांत्रिक मूल्यों को भारतीय संविधान में समाहित किया जा सके। बी.एन. राव की कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने संविधान का पहला कच्चा मसौदा (ड्राफ्ट) मात्र दो महीने में तैयार कर लिया था। इस प्रारंभिक ड्राफ्ट में 240 अनुच्छेद (आर्टिकल) और 13 अनुसूचियां शामिल थीं। इसी ठोस आधार पर बाद में डॉ. आंबेडकर की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति ने काम शुरू किया और इसे अंतिम रूप दिया। राव का स्पष्ट मानना था कि अधिकार केवल कागज पर नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें लागू करने की शक्ति भी होनी चाहिए। इसी विचार ने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) की नींव रखी, जो नागरिकों को सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का हक देता है। संविधान निर्माण के बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बी.एन. राव के योगदान को मुक्तकंठ से सराहा था। उन्होंने कहा था कि राव के ज्ञान और अथक प्रयासों के बिना यह संविधान इस रूप में तैयार नहीं हो पाता। संविधान निर्माण के बाद राव संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि बने और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। आज भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 25 भाग, 12 अनुसूचियां और 105 से अधिक संशोधन शामिल हैं। इस विशाल वटवृक्ष का बीज बोने में बी.एन. राव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/28फरवरी2026 -----------------------------------