राज्य
01-Mar-2026
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इन्दौर (ईएमएस) धर्मवीर भारती की कालजई रचना, कनुप्रिया का संगीतमय मंचन, हंस वाहिनी कला समूह द्वारा संस्था सूत्रधार के आयोजन में किया गया जिसका निर्देशन, श्रीमती डिंपल अग्रवाल ने किया उन्होंने स्वयं भी राधा के एक रूप को मंच पर जीवंत किया। धर्मवीर भारती द्वारा रचित कनुप्रिया (1959) एक आधुनिक संगीत काव्य है, जो राधा के माध्यम से प्रेम, विरह, युद्ध की विभीषिका और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण करता। इसमें राधा, कृष्ण को केवल भगवान नहीं बल्कि कन्नू (प्रियतम) मानकर उनके प्रति पूर्ण समर्पित हो जाती है जहां प्रेम लौकिक से अलौकिक की ओर यात्रा करता है। यह काव्य राधा के मन की परतों को खोलता है। कनुप्रिया में राधा के इतने सारे भावों को उजागर किया गया है कि निर्देशिका डिंपल अग्रवाल ने इसमें तीन राधाओं के माध्यम से उसकी विभिन्न संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया। पहली राधा की भूमिका में सारिका दीक्षित दूसरी राधा डॉ ज्योति शर्मा और तीसरी राधा के रूप में डिंपल अग्रवाल स्वयं रही और इन तीनों ने ही राधा के विभिन्न भाव प्रेम, क्रोध, करुणा, रास, संशय, अनुरोध, आश्चर्य भावो को भली भांति प्रस्तुत किया। इनका अभिनय इतना जीवंत था कि दर्शकों को ऐसा प्रतीत हो रहा था कि राधा स्वयं अपने प्रिय कन्नू से साक्षात्कार कर रही हो। कृष्ण की भूमिका में, निधि वर्मा ने भर्ती बहुत ही भावभीना अभिनय किया। निर्देशिका ने रंगीन प्रकाश ( निर्देशक, ओम कुमार) एवं शास्त्रीय संगीत मय वातावरण, (निर्देशक योग्यता चौहान) में, दर्शकों को राधा एवं कृष्ण के युग में विचरण करवाया । कनुप्रिया की वेशभूषा एवं नृत्य संरचना, सारिका दीक्षित की थी,जिन्होंने तीनों राधा को पृथक पृथक स्वरूपों में सजीव प्रस्तुत कर संपूर्ण नाटक को नृत्य से सजा कृष्ण को बहुत ही सौम्य रूप दिया। मंच संचालन गीतांजलि सांवरिया ने किया। आनंद पुरोहित/ 01 मार्च 2026