पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया जब अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई। बताया गया कि अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान पर 24 घंटे के भीतर 1200 से अधिक बम गिराए। इन हमलों में खामेनेई के साथ उनके परिवार के कई सदस्य और शीर्ष सैन्य कमांडर भी मारे गए। यह घटनाक्रम न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व के लिए निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। ईरान ने इसे सीधी जंग करार देते हुए खतरनाक बदले की चेतावनी दी है। हमलों का केंद्र ईरान की राजधानी तेहरान समेत दस बड़े शहर रहे। ईरानी मीडिया के अनुसार अब तक दो सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हैं। एक स्कूल पर हमले में बड़ी संख्या में छात्राओं के मारे जाने की खबर ने दुनिया को झकझोर दिया। ईरान ने चालीस दिन के राजकीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। देशभर में शोक सभाएं और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए की गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बयान जारी कर कहा कि हमले का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। ट्रम्प ने ईरानी सैनिकों से आत्मसमर्पण की अपील की और कहा कि बमबारी जरूरत पड़ने तक जारी रहेगी। इन बयानों ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और अबू धाबी में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गए। सऊदी अरब की राजधानी रियाद और कतर की राजधानी दोहा में भी सतर्कता बढ़ा दी गई। बहरीन कुवैत जॉर्डन और इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले की खबरें आईं। ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर भी हमला हुआ जिससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने ऑपरेशन टू प्रॉमिस चार की घोषणा की और कहा कि यह बदले की शुरुआत है। संसद अध्यक्ष और अन्य नेताओं ने इसे मुसलमानों के खिलाफ खुली जंग बताया। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि खामेनेई की हत्या का जवाब देना देश का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है। इस बयान के बाद देश में राष्ट्रवादी भावना तेज हो गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई का जीवन ईरान की आधुनिक राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा। उनका जन्म उन्नीस अप्रैल उन्नीस सौ उनतालीस को मशहद में हुआ था। वे उन्नीस सौ इक्यासी में राष्ट्रपति बने और उन्नीस सौ नवासी में रूहोल्लाह खोमैनी के निधन के बाद देश के सर्वोच्च नेता नियुक्त हुए। पिछले सैंतीस वर्षों से वे ईरान की सत्ता के सबसे प्रभावशाली केंद्र रहे। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का रक्षक मानते थे जबकि आलोचक उन पर कठोर नीतियों का आरोप लगाते थे। इस युद्ध के पीछे कई गहरे कारण बताए जा रहे हैं। पहला मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और इजराइल को आशंका रही है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण ऊर्जा और शोध के लिए है। दूसरा मुद्दा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम है जिसे ईरान अपनी सुरक्षा की रेड लाइन मानता है। तीसरा बड़ा कारण इजराइल और ईरान के बीच वैचारिक और रणनीतिक टकराव है। अमेरिका इजराइल का प्रमुख सहयोगी है जबकि ईरान खुले तौर पर इजराइल का विरोध करता रहा है। मध्य पूर्व में प्रभाव को लेकर भी प्रतिस्पर्धा रही है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक सीरिया लेबनान और यमन में अपने समर्थक गुटों को सहायता देकर क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ता है। ईरान इसे अपने हितों की रक्षा बताता है। आर्थिक प्रतिबंधों ने भी तनाव को बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों से ईरानी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई और जवाब में ईरान ने कई बार परमाणु गतिविधियां तेज कीं। इस संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय आयाम भी तेजी से उभर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खामेनेई की हत्या की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। जी सात देशों में भी आपात चर्चा की तैयारी है। संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में उछाल देखा गया और शेयर बाजारों में गिरावट आई। इजराइल में नागरिक बंकरों में शरण लिए हुए हैं और लगातार सायरन बज रहे हैं। तेहरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। दोनों पक्षों ने हजारों ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है जिससे लंबी और व्यापक जंग की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव नहीं रुका तो यह पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। साथ ही क्षेत्रीय शक्तियों की सीधी भागीदारी से संघर्ष और जटिल हो सकता है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने ईरान की राजनीति में नेतृत्व का प्रश्न भी खड़ा कर दिया है। नए सुप्रीम लीडर के चयन तक अस्थायी व्यवस्था लागू की जा सकती है। यह परिवर्तन ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों को प्रभावित करेगा। फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान व तेल अवीव पर टिकी हैं। क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक युद्ध का रूप लेगा यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इतना तय है कि इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया के इतिहास में एक नया अध्याय खोल दिया है और वैश्विक शक्ति संतुलन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। ईएमएस/02/03/2026