* अहमदाबाद में सोला सिविल अस्पताल से राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ, “बेटियों के लिए जीवनरक्षक कवच” गांधीनगर (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया की उपस्थिति में अहमदाबाद की सोला सिविल होस्पिटल से राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की गई। गुजरात कैंसर अनुसंधान संस्थान (जीसीआरआई) के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एचपीवी वैक्सीन को लेकर फैल रही अफवाहों और नकारात्मक टिप्पणियों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह वैक्सीन पूर्णतः सुरक्षित है और बेटियों को जानलेवा सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए अनिवार्य है। देश में सर्वाइकल कैंसर के चिंताजनक आंकड़े भारतीय महिलाओं में पाए जाने वाले कुल कैंसर मामलों में सर्वाइकल कैंसर दूसरे स्थान पर (लगभग 17.7%) है। देश में हर 4 मिनट 12 सेकंड में एक महिला में सर्वाइकल कैंसर का निदान होता है। हर 7 मिनट में एक महिला की मृत्यु इस बीमारी से होती है। लगभग 70–75% मरीज दूसरे या तीसरे स्टेज में जांच के लिए पहुंचते हैं। 30 से 69 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में यह मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 1,27,526 नए मामले और 79,906 मौतें दर्ज हुईं। गुजरात में 4,928 नए मामले और 1,781 मौतें दर्ज की गईं। क्यों जरूरी है एचपीवी वैक्सीन? विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से एचपीवी वायरस के 16 और 18 प्रकार के संक्रमण से होता है। 14 वर्ष की आयु में दी जाने वाली यह वैक्सीन वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी प्रतिरक्षा विकसित करती है। यदि एचपीवी संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो यह ‘सर्वाइकल इंट्राएपीथेलियल नियोप्लासिया (सीआईएन)’ में बदल सकता है, जो 10–20 वर्षों में आक्रामक कैंसर का रूप ले सकता है। यही कारण है कि किशोरावस्था में संक्रमण से पहले टीकाकरण सबसे बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। वैक्सीन की सुरक्षा पर वैश्विक प्रमाण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल एडवाइजरी कमेटी (जीएसीवीएस) ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी वैक्सीन और बांझपन या अन्य गंभीर दुष्प्रभावों के बीच कोई कारण संबंध नहीं है। अमेरिका की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने भी इसे मंजूरी दी है। भारत में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और एनटीएजीआई ने इसके राष्ट्रीय कार्यक्रम में समावेश का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित 100 से अधिक देशों ने इसे अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। ऑस्ट्रेलिया में 2007 से शुरू कार्यक्रम के बाद एचपीवी संक्रमण और उच्च स्तरीय सर्वाइकल घावों में 90% तक कमी दर्ज की गई। यूनाइटेड किंगडम में 12–13 वर्ष की आयु में टीका लेने वाली युवतियों में कैंसर के मामलों में 87% तक गिरावट पाई गई। गुजरात सरकार की ठोस तैयारी राज्य में लगभग 5.50 लाख किशोरियों को टीका देने का लक्ष्य। बाजार में एक डोज की कीमत लगभग रु. 3,000 होने के बावजूद सरकार रु. 150 करोड़ खर्च कर यह टीका निःशुल्क दे रही है। 2°C से 8°C तापमान बनाए रखने के लिए 2,297 कोल्ड-चेन पॉइंट सक्रिय। किसी भी सामान्य दुष्प्रभाव की स्थिति में तत्काल उपचार हेतु प्रत्येक केंद्र पर डॉक्टर और दवाओं की व्यवस्था। TeCHO+ और SAFE-VAC पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग। 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2030 तक 90-70-90 का लक्ष्य निर्धारित किया है: 90% किशोरियों का टीकाकरण 70% महिलाओं की 35 और 45 वर्ष की आयु में स्क्रीनिंग 90% मरीजों को समुचित उपचार गुजरात में ‘ममता दिवस’ के माध्यम से हर वर्ष 13 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं और 12 लाख बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। राज्य स्तर पर उच्च अधिकारियों की सीधी निगरानी और जिला स्तर पर समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति से अभियान को गति दी गई है। विशेषज्ञों की अपील स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी 14 वर्ष की बेटियों को समय पर एचपीवी वैक्सीन अवश्य लगवाएं। “सर्वाइकल कैंसर से बेटी को बचाएं, समय पर एचपीवी टीका लगवाएं — यही भविष्य का सुरक्षा कवच है।” सतीश/05 फरवरी(गांधीनगर) पीएम मोदी ने 28 फरवरी को अजमेर से शुरू किया था देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान * अहमदाबाद में सोला सिविल अस्पताल से राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ, “बेटियों के लिए जीवनरक्षक कवच” गांधीनगर (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया की उपस्थिति में अहमदाबाद की सोला सिविल होस्पिटल से राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की गई। गुजरात कैंसर अनुसंधान संस्थान (जीसीआरआई) के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एचपीवी वैक्सीन को लेकर फैल रही अफवाहों और नकारात्मक टिप्पणियों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह वैक्सीन पूर्णतः सुरक्षित है और बेटियों को जानलेवा सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए अनिवार्य है। देश में सर्वाइकल कैंसर के चिंताजनक आंकड़े भारतीय महिलाओं में पाए जाने वाले कुल कैंसर मामलों में सर्वाइकल कैंसर दूसरे स्थान पर (लगभग 17.7%) है। देश में हर 4 मिनट 12 सेकंड में एक महिला में सर्वाइकल कैंसर का निदान होता है। हर 7 मिनट में एक महिला की मृत्यु इस बीमारी से होती है। लगभग 70–75% मरीज दूसरे या तीसरे स्टेज में जांच के लिए पहुंचते हैं। 30 से 69 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में यह मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 1,27,526 नए मामले और 79,906 मौतें दर्ज हुईं। गुजरात में 4,928 नए मामले और 1,781 मौतें दर्ज की गईं। क्यों जरूरी है एचपीवी वैक्सीन? विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से एचपीवी वायरस के 16 और 18 प्रकार के संक्रमण से होता है। 14 वर्ष की आयु में दी जाने वाली यह वैक्सीन वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी प्रतिरक्षा विकसित करती है। यदि एचपीवी संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो यह ‘सर्वाइकल इंट्राएपीथेलियल नियोप्लासिया (सीआईएन)’ में बदल सकता है, जो 10–20 वर्षों में आक्रामक कैंसर का रूप ले सकता है। यही कारण है कि किशोरावस्था में संक्रमण से पहले टीकाकरण सबसे बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। वैक्सीन की सुरक्षा पर वैश्विक प्रमाण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल एडवाइजरी कमेटी (जीएसीवीएस) ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी वैक्सीन और बांझपन या अन्य गंभीर दुष्प्रभावों के बीच कोई कारण संबंध नहीं है। अमेरिका की खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने भी इसे मंजूरी दी है। भारत में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और एनटीएजीआई ने इसके राष्ट्रीय कार्यक्रम में समावेश का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित 100 से अधिक देशों ने इसे अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। ऑस्ट्रेलिया में 2007 से शुरू कार्यक्रम के बाद एचपीवी संक्रमण और उच्च स्तरीय सर्वाइकल घावों में 90% तक कमी दर्ज की गई। यूनाइटेड किंगडम में 12–13 वर्ष की आयु में टीका लेने वाली युवतियों में कैंसर के मामलों में 87% तक गिरावट पाई गई। गुजरात सरकार की ठोस तैयारी राज्य में लगभग 5.50 लाख किशोरियों को टीका देने का लक्ष्य। बाजार में एक डोज की कीमत लगभग रु. 3,000 होने के बावजूद सरकार रु. 150 करोड़ खर्च कर यह टीका निःशुल्क दे रही है। 2°C से 8°C तापमान बनाए रखने के लिए 2,297 कोल्ड-चेन पॉइंट सक्रिय। किसी भी सामान्य दुष्प्रभाव की स्थिति में तत्काल उपचार हेतु प्रत्येक केंद्र पर डॉक्टर और दवाओं की व्यवस्था। TeCHO+ और SAFE-VAC पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग। 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2030 तक 90-70-90 का लक्ष्य निर्धारित किया है: 90% किशोरियों का टीकाकरण 70% महिलाओं की 35 और 45 वर्ष की आयु में स्क्रीनिंग 90% मरीजों को समुचित उपचार गुजरात में ‘ममता दिवस’ के माध्यम से हर वर्ष 13 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं और 12 लाख बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। राज्य स्तर पर उच्च अधिकारियों की सीधी निगरानी और जिला स्तर पर समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति से अभियान को गति दी गई है। विशेषज्ञों की अपील स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी 14 वर्ष की बेटियों को समय पर एचपीवी वैक्सीन अवश्य लगवाएं। “सर्वाइकल कैंसर से बेटी को बचाएं, समय पर एचपीवी टीका लगवाएं — यही भविष्य का सुरक्षा कवच है।” सतीश/05 फरवरी