-रूसी सैन्य विशेषज्ञ और एयर डिफेंस इतिहासकार ने किया जंग पर आकलन तेहरान,(ईएमएस)। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग में कौन भारी पड़ेगा यही सबसे बड़ा सवाल है। ट्रंप कह रहे हैं कि उनके पास हथियारों की अनलिमिटेड जखीरा है। वहीं ईरान की ओर से लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति को समझें तो हालात अमेरिका के लिए अच्छे नहीं हैं। स्थिति ये है कि ईरान एक महीने तक लगातार हमला कर सकता है। इजराइल इस समय एयर डिफेंस से हमले रोकने में कामयाब हो रहा है, लेकिन बड़ा सवाल है कि अगर जंग लंबी चली तो क्या होगा? पेंटागन चिंतित है, क्योंकि एयर डिफेंस लगातार कमजोर हो रहा है। रूसी सैन्य विशेषज्ञ और एयर डिफेंस इतिहासकार यूरी क्नुतोव ने अमेरिका-ईरान की जंग पर बड़ा आकलन किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक क्नुतोव ने अलग-अलग रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ईरान के पास 2,000 से 4,000 तक बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं। अगर ईरान रोज 100 या उससे ज्यादा मिसाइलें दागता है, तो वह करीब एक महीने तक तेज हमले जारी रख सकता है यानी शुरुआत में ईरान के पास हमला जारी रखने की क्षमता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पास थॉड और पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस सिस्टम हैं। थॉड इंटरसेप्टर अब तक सिर्फ 650 बने हैं। पहले हमलों में 150 इस्तेमाल हो चुके हैं यानी करीब 400 के आसपास बचे हैं। अगर एक ईरानी मिसाइल को गिराने के लिए 8–10 इंटरसेप्टर दागने पड़ें, तो तीन हफ्ते में यह भी तेजी से खत्म हो सकता है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक अंदरूनी सूत्रों को डर है कि यह जंग कुछ दिनों में खत्म होने के बजाय हफ्तों तक चल सकती है, जिससे अमेरिका के सीमित एयर डिफेंस स्टॉक पर भारी दबाव पड़ेगा। एक अधिकारी ने कहा कि यहां माहौल बेहद तनावपूर्ण है। वरिष्ठ नेताओं को डर है कि अगर लड़ाई लंबी चली तो इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से घटेगा। हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य एडम स्मिथ ने कहा कि ‘अब लड़ाई शुरू हो चुकी है। हम ईरान से यह नहीं कह सकते कि हमारे पास मिसाइल डिफेंस खत्म हो गए हैं, थोड़ा रुक जाइए। हमारे संसाधन पहले ही काफी खिंचे हुए हैं। रूसी विशेषज्ञ के मुताबिक ईरान के पास सबसे बड़ा हथियार उसकी एडवांस्ड मिसाइलें हैं। खासकर हाइपरसोनिक ‘फतह’ मिसाइलें। उनका दावा है कि इन मिसाइलों को इजराइल की एरो-3 और अमेरिकी थॉड या पेट्रोट सिस्टम पूरी तरह रोक नहीं पाते। अगर ईरान इन उन्नत मिसाइलों को डिफेंस सिस्टम के कमजोर होने तक आखिरी समय के लिए बचाकर रखे है तो वह अमेरिका और इजराइल को बड़ा झटका दे सकता है। अमेरिका हर महीने करीब 55 इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाता है। यह संख्या बड़े युद्ध के दौरान तेजी से खत्म हो रहे स्टॉक को भरने के लिए काफी नहीं है। जर्मनी और रोमानिया में नई फैक्ट्रियां बन रही हैं, लेकिन वे अभी चालू नहीं हुई हैं। अरब देशों से कुछ मदद मिल सकती है, लेकिन वे भी अपने बचाव के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सऊदी के एक अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिका ने उनकी मिसाइलों को इजराइल को बचाने में लगा दिया है। इसे लेकर उनकी नाराजगी भी दिखी। क्नुतोव का अनुमान है कि इतनी तीव्र मिसाइल जंग 2 से 3 हफ्ते, ज्यादा से ज्यादा 4 हफ्ते तक चल सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान की असली क्षमता का पूरा अंदाजा नहीं है। संभव है कि उसके पास अंडरग्राउंड फैक्ट्रियां हों, जहां मिसाइलें बन रही हों। सिराज/ईएमएस 06 मार्च 2026