वाशिंगटन,(ईएमएस)। इजरायल और ईरान की बीच शुरु हुई जंग से एशियाई, मिडिल ईस्ट और कुछ पश्चिमी देश बेहद टेंशन में हैं। जंग शुरू होते ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की घोषणी की थी, जिसकी वजह से उधर तेल और गैस का निर्यात करने वाले एशियाई और पश्चिमी देश टेंशन में आ गए। इस बीच अमेरिका की तरफ से बेहद राहत देने वाली खबर सामने आई है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ, तब संयुक्त राज्य अमेरिका होर्मुज जलडमरू मध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए नौसैनिक सुरक्षा दल तैनात कर सकता है। ईरान के साथ संघर्ष ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं। होर्मुज के रास्ते 1.5 से 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और गैस का निर्यात होता है। व्हाइट हाउस में ब्रीफिंग के दौरान प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी रहने के कारण अमेरिका तेल बाजारों और समुद्री यातायात पर कड़ी नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और जहाजों की सुरक्षा के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं। यूएस डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन खाड़ी क्षेत्र में और उसके आसपास चलने वाले कच्चे तेलवाहक और मालवाहक जहाजों के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षा बिगड़ने की स्थिति में अमेरिकी नौसेना सीधे हस्तक्षेप करेगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अगर जरूरी होने पर अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर देगी। इस कदम का मकसद ईरान के साथ संघर्ष तेज होने के कारण वैश्विक तेल प्रवाह में व्यवधान को रोकना है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा बाजारों में केंद्रीय भूमिका निभाता है। बात दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की वैश्विक तेल आपूर्ति के 20 प्रतिशत को नियंत्रित करता है। व्हाइट हाउस ने कहा कि प्रशासन संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए अपनी आर्थिक और ऊर्जा टीमों के साथ मिलकर काम कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अर्थव्यवस्था संघर्ष से उत्पन्न होने वाले अस्थाई झटकों को सहन कर सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और उनकी आर्थिक टीम का मानना है कि अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत बनी हुई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के खिलाफ हालिया कार्रवाई से अंततः वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता में सुधार हो सकता है। लीविट ने तर्क दिया कि इस संघर्ष से रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरने वाले जहाजों पर तेहरान का प्रभाव कम हो जाएगा। ईरान अब इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को धमकी नहीं दे पाएगा। उन्होंने कहा, ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित नहीं कर पाएगा और ऊर्जा के मुक्त प्रवाह को प्रतिबंधित नहीं कर पाएगा। आशीष/ईएमएस 06 मार्च 2026