तेहरान,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट इस वक्त बारूद के ढेर पर है। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई समेत शीर्ष नेतृत्व का खात्मा कर ईरान में हाहाकार मचा दिया है। तेहरान की सड़कों पर बरसते बम और जवाबी कार्रवाई में इजरायल पर गिरती ईरानी मिसाइलों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। खाड़ी देशों पर होते हमलों ने वैश्विक तेल बाजार में आग लगा दी है। लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो एक चौंकाने वाला सच सामने आता है आज एक-दूसरे के खून के प्यासे ये दोनों देश कभी तेल के यार हुआ करते थे। यह कहानी 1967 के छह दिवसीय युद्ध से शुरू होती है। उस वक्त इजरायल ने मिस्र, जॉर्डन और सीरिया को धूल चटाई थी, जिसके जवाब में मिस्र ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक धमनी यानी स्वेज नहर को बंद कर दिया था। स्वेज नहर बंद होने से इजरायल के पास तेल आयात का रास्ता बंद हो गया और ईरान के पास तेल निर्यात का। इसी मजबूरी ने कट्टर दुश्मनों को दोस्त बना दिया।1975 तक स्वेज नहर बंद रही, और इसी दौरान 1968 में ईरान और इजरायल ने एक ज्वाइंट वेंचर शुरू किया। उन्होंने लाल सागर के इलात बंदरगाह को भूमध्य सागर के अशकेलोन से जोड़ने के लिए एक गुप्त तेल पाइपलाइन बनाई। इस 254 किलोमीटर लंबी और 42 इंच चौड़ी पाइपलाइन को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए पनामा और लिक्टेंस्टीन आधारित शेल कंपनियों का सहारा लिया गया। हालांकि, अमेरिका की सीआईए (सीआईए) से यह राज छिप न सका। अप्रैल 1968 की एक डीक्लासिफाइड रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस पाइपलाइन का मुख्य स्रोत था, जहाँ से तेल पूर्वी यूरोप भेजा जाता था। यह रास्ता केप ऑफ गुड होप से कहीं ज्यादा सस्ता और सुगम था। आज वक्त बदल चुका है। जो तेल कभी दोनों देशों की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन था, आज वही युद्ध की भेंट चढ़ रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई ने पुरानी दोस्ती को ऐसी नफरत में बदला है कि अब सुलह की गुंजाइश खत्म नजर आती है। जहां कभी सुपरटैंकर तेल खाली करते थे, आज वहां युद्धपोत तैनात हैं। स्वेज नहर की अहमियत आज भी बरकरार है, लेकिन ईरान-इजरायल के बीच की वह सीक्रेट पाइपलाइन अब इतिहास के मलबे में दब चुकी है। वीरेंद्र/ईएमएस 06 मार्च 2026