अंतर्राष्ट्रीय
06-Mar-2026
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तेहरान(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध के बीच एक बड़ा सैन्य उलटफेर देखने को मिला है। ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कमान अब ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को सौंपी गई है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान की सीनियर मिलिट्री लीडरशिप को इजरायल और अमेरिका के हमलों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हाल ही में मोहम्मद पाकपुर और हुसैन सलामी जैसे शीर्ष कमांडरों की मौत के बाद वाहिदी को इस बेहद शक्तिशाली पद की जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के पुराने दुश्मन माने जाने वाले वाहिदी की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि ईरान अब इस जंग में आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी का सैन्य और राजनीतिक करियर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है। वे 1970 के दशक के अंत से ही आईआरजीसी के साथ जुड़े हुए हैं और 1980 के दशक में उन्होंने खुफिया और सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उल्लेखनीय है कि वाहिदी ने 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स की कमान संभाली थी, जो आईआरजीसी की विदेशी शाखा है। इसी कुद्स फोर्स की कमान बाद में कासिम सुलेमानी को मिली थी, जिन्हें 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार दिया गया था। वाहिदी न केवल एक मंझे हुए सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि उनके पास प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव भी है। वे पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के कार्यकाल में रक्षा मंत्री और दिवंगत इब्राहिम रईसी के समय गृह मंत्री के पद पर रह चुके हैं। दिसंबर 2025 में दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने वाहिदी को आईआरजीसी का डिप्टी चीफ नियुक्त किया था। वाहिदी ने हमेशा इस्लामिक रिवॉल्यूशन की रक्षा को अपना सर्वोच्च लक्ष्य बताया है। हालांकि, उनका विवादों से भी पुराना नाता रहा है। 1994 में अर्जेंटीना के अमिया ज्यूइश सेंटर पर हुए बम धमाकों में उनका नाम उछला था, जिसके बाद इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस भी जारी किया था। इसके अलावा, 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन में भूमिका निभाने के चलते अमेरिका और यूरोपीय संघ ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। युद्ध के इस नाजुक मोड़ पर वाहिदी की नियुक्ति के पीछे उनकी सख़्त छवि और ब्यूरोक्रेटिक समझ को मुख्य कारण माना जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व कमांडरों की तुलना में वाहिदी अधिक अनुभवी और कड़े फैसले लेने वाले रणनीतिकार हैं। उनके पास मिलिट्री और पॉलिटिक्स दोनों का अनूठा मिश्रण है, जो मौजूदा युद्ध के समय आईआरजीसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वाहिदी के नेतृत्व में ईरान की सैन्य रणनीति क्या रुख अख्तियार करती है, क्योंकि अब देश की रक्षा की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। वीरेंद्र/ईएमएस/06मार्च2026