06-Mar-2026
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-एम्स में बनना है क्रिटिकल केयर यूनिट, ये होगा फायदा भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल में स्थित एम्स में गंभीर मरीजों को जल्द और गुणवत्तायुक्त इलाज देने के लिए करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से क्रिटिकल केयर यूनिट बनाई जा रही है। लेकिन डेडलाइन पूरी होने के बाद भी अब तक निर्माण पूरा नहीं हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि, फरवरी 2025 तक तैयार होने वाला यह हाई-टेक आईसीयू भवन अपनी तय समयसीमा से करीब 11 महीने पीछे चल रहा है। फंड की कमी और निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण अब तक केवल 80 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। ऐसे में हर दिन एम्स पहुंचने वाले गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को इस सुविधा के शुरू होने का इंतजार करना पड़ रहा है। 13 फरवरी तक पूरा करना था प्रोजेक्ट एम्स भोपाल के प्रोजेक्ट मैनेजर आशुतोष जैन ने बताया कि, 150 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट बनाने का प्रस्ताव सितंबर 2022 में स्वीकृत हुआ था। इसके बाद 14 मई 2023 को निर्माण कार्य शुरू किया गया। वहीं अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी को यह प्रोजेक्ट 13 फरवरी 2025 तक हर हाल में पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बाद भी काम अधूरा है। गंभीर मरीजों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू न होने से सबसे अधिक परेशानी गंभीर मरीजों को झेलनी पड़ रही है। एम्स भोपाल में रोजाना ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिन्हें हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण या अन्य जटिल बीमारियों के लिए तुरंत उन्नत इलाज की जरूरत होती है। नई यूनिट शुरू होने से इन मरीजों को एम्स में ही बेहतर इलाज मिल सकता था, लेकिन फिलहाल उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों या दूसरे बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता है। चार मंजिला अत्याधुनिक आईसीयू भवन होगा तैयार आशुतोष जैन ने बताया कि, एम्स परिसर में चार मंजिला अत्याधुनिक आईसीयू भवन बनाया जा रहा है। इस भवन में 150 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट के साथ जेनेटिक क्रिटिकल केयर विभाग और पल्मोनरी मेडिसिन आईसीयू भी विकसित किया जाएगा। इसके अलावा ट्रॉमा और इमरजेंसी मरीजों के लिए 20 बेड आरक्षित रखने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में आठ बेड का अलग आईसीयू भी तैयार किया जा रहा है। यूनिट शुरू होने से यह होंगे फायदे यह यूनिट शुरू होने के बाद एम्स भोपाल में गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को तत्काल और उन्नत इलाज मिल सकेगा। इसके साथ ही मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में देरी न केवल लागत बढ़ाती है बल्कि मरीजों की जान पर भी असर डाल सकती है। विनोद / 06 मार्च 26