दुबई,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच एक अत्यंत गंभीर घटनाक्रम सामने आया है, जिसने वैश्विक भू-राजनीति में खलबली मचा दी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सेना ने सुनियोजित तरीके से क्षेत्र के कम से कम सात अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। इन हमलों ने न केवल संचार प्रणालियों (कम्युनिकेशन सिस्टम) को ध्वस्त किया है, बल्कि रडार नेटवर्क और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी भारी क्षति पहुंचाई है। सप्ताहांत से लेकर सोमवार तक हुए ये हमले बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सेना की कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क की रीढ़ कहे जाने वाले सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनलों और रडार डोम को पंगु बनाना था। हमलों की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कतर स्थित अल उदीद एयर बेस, जो इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य ठिकाना है, को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया। इसके अतिरिक्त, ईरानी ड्रोनों ने रियाद और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों सहित सऊदी अरब और कतर के तेल एवं गैस संयंत्रों पर भी हमले किए, जिससे ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है। विशेषज्ञों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ईरान ने इतनी सटीकता के साथ इन संवेदनशील ठिकानों को कैसे खोजा? इसका उत्तर रूस और ईरान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग में छिपा नजर आता है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से रूस लगातार ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संपत्तियों की सटीक स्थिति मुहैया करा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि संघर्ष के शुरुआती दौर में ईरान की अपनी ट्रैकिंग क्षमता कमजोर पड़ गई थी, ऐसे में रूसी खुफिया जानकारी उसके लिए संजीवनी साबित हुई। विश्लेषकों का मानना है कि रूस, यूक्रेन को मिल रही अमेरिकी सैन्य सहायता का बदला लेने के लिए ईरान को मोहरा बना रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जहां रूस और ईरान के संबंध ऐतिहासिक स्तर पर मजबूत हुए हैं, वहीं चीन इस सैन्य खींचतान से दूरी बनाए हुए है। हालांकि ईरान ने रूस को सस्ते स्ट्राइक ड्रोन और तकनीक प्रदान कर यूक्रेन युद्ध में उसकी मदद की है, लेकिन बदले में मिल रही सामरिक जानकारी अब खाड़ी में अमेरिका के लिए सिरदर्द बन गई है। अमेरिकी और इजरायली सेनाओं के कड़े प्रतिरोध के बावजूद ईरान ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। वह वाशिंगटन और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक प्रहार जारी रखे हुए है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि इस युद्ध की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। यदि रूसी खुफिया तंत्र इसी तरह तेहरान का मार्गदर्शन करता रहा, तो आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों पर होने वाले हमले और भी घातक और बार-बार होने वाले साबित हो सकते हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/07मार्च2026